रांची। झारखंड हाई कोर्ट में न्यायिक व्यवस्था को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने रांची स्थित झारखंड हाई कोर्ट परिसर में लगभग 35 करोड़ रुपये की लागत से बने डेटा सेंटर का उद्घाटन किया। इस पहल का उद्देश्य न्यायिक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना, अदालतों के डिजिटल कामकाज को मजबूत करना और न्यायिक सेवाओं को अधिक सुगम बनाना है।
इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एस. चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह सहित न्यायिक क्षेत्र के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान हाई कोर्ट की नई वेबसाइट समेत कई डिजिटल सुविधाओं की शुरुआत भी की गई।
न्यायिक व्यवस्था में तकनीक की अहम भूमिका
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से न्यायिक व्यवस्था को अधिक सुलभ, प्रभावी और जवाबदेह बनाया जा सकता है। उन्होंने जोर दिया कि तकनीकी सुविधाओं की सफलता का आकलन इस आधार पर होना चाहिए कि उनसे वकीलों, वादकारियों, न्यायाधीशों और आम नागरिकों को कितना लाभ मिलता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) न्यायिक कामकाज में मददगार हो सकते हैं, लेकिन वे न्यायाधीशों के विवेक और मानवीय निर्णय का स्थान नहीं ले सकते।
सुरक्षित रहेंगे न्यायिक रिकॉर्ड
नया डेटा सेंटर झारखंड हाई कोर्ट और राज्य की अधीनस्थ अदालतों के डिजिटल कामकाज को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके माध्यम से न्यायिक रिकॉर्ड के प्रबंधन, डिजिटल दस्तावेजों के सुरक्षित भंडारण और विभिन्न तकनीकी सेवाओं के संचालन में मदद मिलेगी। बेहतर डेटा प्रबंधन से न्यायिक सूचनाओं तक समय पर पहुंच बनाने में भी सहूलियत होगी।
ऑनलाइन मिलेंगी कई न्यायिक सुविधाएं
डेटा सेंटर के उद्घाटन के साथ हाई कोर्ट की नई वेबसाइट और न्यायिक सेवाओं से जुड़ी अन्य डिजिटल सुविधाएं भी शुरू की गईं। इनमें प्रमाणित प्रतियों के लिए ऑनलाइन आवेदन, अधिवक्ताओं के लिए व्यक्तिगत कॉज लिस्ट और न्यायिक अधिकारियों के कामकाज में सहायता देने वाले सॉफ्टवेयर शामिल हैं।
इसके अलावा, न्यायिक अधिकारियों को AI आधारित कानूनी सॉफ्टवेयर ‘सुप्रीम टुडे’ और स्पीच-टू-टेक्स्ट सॉफ्टवेयर ‘ड्रैगन’ उपलब्ध कराया गया है। इन सुविधाओं से न्यायिक दस्तावेज तैयार करने और कानूनी जानकारी तक पहुंच बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
आम लोगों को भी मिलेगा लाभ
डिजिटल सेवाओं के विस्तार से वकीलों और मुकदमे से जुड़े लोगों को केस की स्थिति, न्यायिक आदेश और अन्य जरूरी सूचनाएं प्राप्त करने में आसानी हो सकती है। ऑनलाइन प्रमाणित प्रति के लिए आवेदन की सुविधा से लोगों को अनावश्यक रूप से अदालतों के चक्कर लगाने से भी राहत मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, डिजिटल व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए डेटा सुरक्षा, तकनीकी विश्वसनीयता और उन लोगों की जरूरतों का ध्यान रखना भी जरूरी होगा, जिन्हें ऑनलाइन सेवाओं के इस्तेमाल में कठिनाई होती है।
झारखंड हाई कोर्ट में डेटा सेंटर की शुरुआत को राज्य की न्यायिक व्यवस्था के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न्यायिक रिकॉर्ड के बेहतर प्रबंधन और डिजिटल सेवाओं के विस्तार का रास्ता मजबूत होगा।
