विधानसभा चुनाव की तैयारियों के साथ झारखंड की सत्ता में बहुमत के साथ लौटने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही भाजपा ने इस बार 65 प्लस के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कितना जोर लगा दिया है, इसका अंदाजा इसी बात से लग जाता है कि खुद मुख्यमंत्री रघुवर दास पिछले 10 दिन में राज्य के आधे विधानसभा क्षेत्रों को कवर कर चुके हैं। भाजपा की चुनावी तैयारी में रघुवर दास की इस भूमिका ने पार्टी की संभावनाओं को ज्यादा मजबूत कर दिया है। रघुवर दास के इस दांव ने जहां विरोधियोें को काफी पीछे छोड़ दिया है, वहीं राजनीतिक रूप से भाजपा को बढ़त भी दिला दी है। रघुवर दास ने इसाई बहुल इलाकों में जाकर धर्मांतरण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर कड़ा रुख अख्तियार करने की चेतावनी दी है। इससे जहां भाजपा के लोग उत्साहित हैं, वहीं आदिवासी सदान मतदाताओं पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ने की पूरी संभावना है। रघुवर दास ने गुमला-लोहरदगा में धर्मांतरण करानेवालों को सख्त चेतावनी देकर साफ कर दिया है कि भाजपा के शासनकाल में यह गोरखधंधा किसी भी कीमत पर चलने नहीं दिया जायेगा। धर्मांतरण के खिलाफ रघुवर दास के तेवर से राज्य के दूसरे हिस्सों में भी सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। विधानसभा चुनाव की तैयारियों और पिछले 10 दिन में खास कर रघुवर दास के रुख को रेखांकित करती आजाद सिपाही पॉलिटिकल ब्यूरो की विशेष रिपोर्ट।
दो दिन पहले जब मुख्यमंत्री रघुवर दास भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के साथ लोहरदगा और गुमला के दौरे पर गये, तो उन्होंने अपने भाषण में धर्म के नाम पर अधर्म को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करने का ऐलान किया। विधानसभा चुनाव के ठीक पहले धर्मांतरण का गोरख धंधा चला रही इसाई मिशनरियों के लिए यह सख्त चेतावनी थी। लेकिन इस दौरे के पहले से ही यह बात साफ हो चुकी थी कि भाजपा झारखंड का विधानसभा चुनाव रघुवर दास के नेतृत्व में ही लड़ेगी और वह इसे पूरी गंभीरता से ले रही है। इसलिए पिछले 10 दिन में ही रघुवर दास ने राज्य के 81 विधानसभा क्षेत्रों में से आधे को कवर कर लिया है। उन्होंने कोल्हान के चाईबासा, दक्षिणी छोटानागपुर के गुमला-लोहरदगा, उत्तरी छोटानागपुर के हजारीबाग और पलामू के मेदिनीनगर में पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मेलन में हिस्सा लेकर साफ कर दिया कि विरोधियों के मुकाबले भाजपा की चुनावी मशीनरी बहुत तेज है। इन सम्मेलनों में रघुवर दास ने जहां अपनी और केंद्र की मोदी सरकार की उपलब्धियों का प्रचार-प्रसार करने को कहा, वहीं भाजपा के कार्यकर्ताओं को पार्टी के 65 प्लस के लक्ष्य को भी याद कराया।
इसाई बहुल इलाके से किया आगाज
रघुवर दास ने भाजपा की चुनावी तैयारी का आगाज धमाकेदार अंदाज में किया। उन्होंने एक खास रणनीति के तहत उन इलाकों को चुना, जहां भाजपा को अधिक मेहनत करने की जरूरत नहीं है। उदाहरण के लिए हजारीबाग, गुमला, लोहरदगा और पलामू जिलों को इसमें शामिल किया जा सकता है। रघुवर ने इन स्थानों पर कार्यकर्ताओं को स्थानीय मुद्दों के साथ कुछ संवेदनशील मुद्दों पर भी ध्यान देने को कहा। इसाई बहुल गुमला-लोहरदगा में उन्होंने धर्मांतरण के खिलाफ सख्त रवैया अपनाने का संकल्प दोहराया, तो हजारीबाग-चतरा में उनके निशाने पर नक्सलवाद और उसके घोर समर्थक रहे। रघुवर दास की रणनीति यही है कि वह पहले उन इलाकों में अपनी मजबूती को अंतिम स्वरूप दे दें, फिर संथाल या वैसे दूसरे इलाकों में अधिक समय भी देना पड़ेगा, तो कोई दिक्कत नहीं होगी। इसलिए उन्होंने पहले चरण में वैसे इलाकों का चयन किया है, जहां भाजपा अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में है।
कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह
भाजपा के कार्यकर्ता सम्मेलनों में रघुवर दास के भाषणों पर खूब तालियां बज रही हैं। उनके संबोधन से कार्यकर्ताओं के साथ आम लोगों में भी नये उत्साह का संचार हो रहा है। इतना ही नहीं, रघुवर दास की चेतावनियों का असर पूरे राज्य में दिखाई दे रहा है। चाहे खूंटी हो या गुमला, चाईबासा हो या संथाल का इलाका, इन दिनों धर्मांतरण का धंधा लगभग बंद हो चुका है। इसी तरह नक्सली गतिविधियां भी लगभग थम सी गयी हैं।
चेतावनी के साथ हिदायत भी
रघुवर दास ने अब तक के अपने भाषणों में जहां अपने कार्यकाल के दौरान हुए विकास कार्यों का विवरण दिया है, वहीं उन्होंने विकास विरोधी ताकतों को चेतावनी भी दी है। यदि उनके पिछले पांच भाषणों पर गौर किया जाये, तो साफ हो जाता है कि अब वह विरोधियों के प्रति अधिक आक्रामक हो गये हैं। यह इस बात का संकेत है कि रघुवर दास किसी भी कीमत पर चुनाव का यह अवसर हाथ से जाने देने के लिए तैयार नहीं हैं। वह लगातार क्षेत्रों से फीडबैक ले रहे हैं और केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश के अनुरूप बेहतर तालमेल से काम कर रहे हैं। रघुवर दास एक और बात पर खास ध्यान रख रहे हैं कि वह चेतावनी के साथ हिदायत भी दे रहे हैं। मसलन धर्मांतरण करनेवालों को उन्होंने चेतावनी तो दी, लेकिन लोगों को यह हिदायत दे डाली कि वे ऐसे तत्वों से सतर्क रहें।
चुनाव में मिलेगा लाभ
रघुवर दास की इस रणनीति का लाभ चुनाव में निश्चित रूप से भाजपा को मिलेगा। विपक्षी दल जहां लोगों को भाजपा के खिलाफ एकजुट करने की कोशिश में लगे हैं, वहीं रघुवर दास अकेले दम पर महफिल लूट ले जा रहे हैं। लोगों के बीच इसका असर भी दिख रहा है और विपक्षी दलों के पास अब वोट मांगने का कोई ठोस आधार नहीं बच गया है।
कुल मिला कर कहा जाये, तो झारखंड के विधानसभा चुनाव के परिदृश्य को रघुवर दास ने बेहद रोमांचक बना दिया है। आज जो हालत है, उसमें यदि यह कहा जाये कि भाजपा पूरी तरह हावी है, तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव के दिन मतदान केंद्रों पर वोटरों की अंगुली किस बटन पर दबेगी, लेकिन फिलहाल तो साफ हो गया है कि झारखंड में भाजपा की चुनावी तैयारी में रघुवर के तड़के ने इसका रंग चोखा और स्वाद को बेहद चटकदार बना दिया है। विपक्षी दलों को इसका जवाब तलाशने में बहुत परेशानी होगी।