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    Home»Breaking News»इंडियन नेवी को मिला एक और खतरनाक हथियार, इसके सामने दुश्मन की मिसाइल हो जाएंगी फेल
    Breaking News

    इंडियन नेवी को मिला एक और खतरनाक हथियार, इसके सामने दुश्मन की मिसाइल हो जाएंगी फेल

    shivam kumarBy shivam kumarApril 6, 2021No Comments5 Mins Read
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    डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) की तरफ से एक ऐसी टेक्‍नोलॉजी ईजाद की गई है जिसके बाद भारतीय नौसेना और ताकतवर हो जाएगी. दुश्‍मन की मिसाइल से वॉरशिप्‍स को बचाने के लिए इस एडवांस्‍ड टेक्‍नोलॉजी को नौसेना ने विकसित किया है. डीआरडीओ की इस टेक्‍नोलॉजी को एक बड़ी उपलब्धि करार दिया जा रहा है. एक माह के अंदर नौसेना को दूसरी बड़ी खतरनाक टेक्‍नोलॉजी हासिल हुई है.

    नौसेना की हर जरूरत होगी पूरी

    हाल ही में इंडियन नेवी ने अरब सागर में चैफ टेक्‍नोलॉजी के सभी तीन वर्जन को टेस्‍ट किया है. नेवी ने इन टेस्‍ट्स के बाद परफॉर्मेंस को संतोषजनक माना है.

    इस टेक्‍नोलॉजी के बाद दुश्‍मन के लिए किसी भी जहाज को मिसाइल से निशाना बनाना असंभव हो जाएगा. डीआरडीओ की जोधपुर स्थित डिफेंस लैबोरेट्री (डीएलजे) ने इस टेक्‍नोलॉजी को विकसित किया है.

    डीएलजे, डीआरडीओ की ही यूनिट है. इस टेक्‍नोलॉजी को काफी संवेदनशील करार दिया जा रहा है. इस तकनीक को लॉन्‍ग रेंज चैफ रॉकेट लॉन्‍चर (LRCR), मीडियम रेंज चैफ रॉकेट (MRCR) और शॉर्ट रेंज चैफ रॉकेट (SRCR) के तौर पर जाना जाएगा. बताया जा रहा है कि ये तकनीक इंडियन नेवी की सभी जरूरतों को पूरा कर सकेगी.

    कैसे करेगी काम

    चैफ को सबसे पहले द्वितीय विश्‍व युद्ध के समय डेवलप किया गया था. रडार पर कोई एयरक्राफ्ट या दूसरा टारगेट नजर आने पर छोटे या फिर हल्‍के एल्‍म्‍युनियम के टुकड़े क्‍लस्‍टर में रडार स्‍क्रीन को निशाना बनाते हैं.

    आज के समय में कई देशों की नौसेनाएं रडार गाइडेड मिसाइल को उनके टारगेट से हटाने के लिए चैफ टेक्‍नोलॉजी का प्रयोग करने लगी हैं. ज्‍यादातर मिलिट्री एयरक्राफ्ट और वॉरशिप्‍स में अब चैफ डिस्‍पेंसिंग सिस्‍टम है और इसे सेल्‍फ डिफेंस सिस्‍टम के तौर पर देखा जाता है.

    नेवी के टेस्‍ट पर खरी उतरी तकनीक

    इंडियन नेवी ने हाल ही में इसके तीनों वर्जन टेस्‍ट किए और इसे सकारात्‍मक तकनीक बताया है. एक रक्षा अधिकारी की तरफ से बताया गया है कि चैफ टेक्नोलॉजी ‘आत्मनिर्भर भारत’ की ओर एक और कदम है.

    डीआरडीओ ऑफिसर ने बताया कि चैफ एक इलेक्ट्रॉनिक टेक्‍नोलॉजी है जिसका प्रयोग दुनियाभर में नेवी की वॉरशिप्‍स को दुश्मन के रडार और रेडियो फ्रीक्वेंसी (आरएफ) मिसाइल से बचाने के लिए किया जाता है.

    यह तकनीकी इसलिए भी और महत्‍वपूर्ण है क्‍योंकि वॉरशिप्‍स की सुरक्षा को लेकर दुश्मन की मिसाइलों को नष्‍ट करने के लिए हवा में तैनात बहुत कम मात्रा में चैफ कार‍गर हो पाती है. रक्षा मंत्री​ ​राजनाथ सिंह की तरफ से डीआरडीओ​ और इंडियन नेवी को बधाई दी गई है.

    समंदर में ट्रैक होगी मिसाइल

    एक माह के अंदर इंडियन नेवी को एक ऐसी टेक्‍नोलॉजी मिली है जो घातक है. मार्च में इंडियन नेवी के लिए एक ऐसी ही टेक्‍नोलॉजी को टेस्‍ट किया गया था. नौसेना को जल्‍द ही एक ऐसा हथियार मिलने वाला है जिसके बाद वह समंदर में चीन और पाकिस्‍तान की किसी भी हिमाकत का जवाब देने में पूरी तरह से समर्थ हो सकेगी.

    नेवी को जल्‍द ही आईएनएस ध्रुव से लैस किया जाएगा. आईएनएस ध्रुव यानी वह हथियार जिसके बाद नेवी परमाणु मिसाइल को ट्रैक करने से लेकर दुश्‍मन के सैटेलाइट और आने वाली बैलेस्टिक मिसाइल का पता भी लगा सकेगी.

    इसके अलावा आईएनएस ध्रुव लैंड बेस्‍ड सैटेलाइट्स का पता भी लगा सकेंगे. रक्षा विशेषज्ञ इसे भारत की एंटी-बैलेस्टिक मिसाइल की क्षमता में अहम रोल अदा करने वाला हथियार करार दे रहे हैं.

    INS ध्रुव से लैस होगी नेवी

    आईएनएस ध्रुव या VC11184 सर्विलांस शिप एक रिसर्च वेसल और मिसाइल की रेंज पता लगाने वाला जहाज है. इसे हिन्‍दुस्‍तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) ने तैयार किया है.

    यह जहाज इलेक्‍ट्रॉनिक इंटेलीजेंस तक इकट्ठा करने वाली क्षमता से लैस है. इस शिप को पहले सिर्फ शिपयार्ड की तरफ से मिले नंबर से ही जाना जाता था.

    शिप का प्रयोग सैटेलाइट्स और मिसाइल को ट्रैक करके भारत के रणनीतिक हथियारों और एंटी-बैलेस्टिक मिसाइलों को मदद करने में किया जाएगा.

    सीक्रेट मिशन के तहत हुई तैयार

    इंडियन नेवी के इस जहाज को नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (NTRO) और डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) की तरफ से ऑपरेट किया जाएगा.

    इस जहाज पर जारी विकास कार्य और इससे जुड़ी हर जानकारी बहुत ही सीक्रेट रखा गया था. साल 2019 की शुरुआत में इसके सी-ट्रायल्‍स की खबरें आई थीं. अक्‍टूबर 2020 में बिना कमीशनिंग सेरेमनी के इसे नौसेना में शामिल कर दिया गया था.

    आधिकारिक सूत्रों की मानें तो शिप को भी अभी नेवी में कमीशन करना बाकी है. इस शिप के ऑपरेट होते ही भारत, अमेरिका, चीन, फ्रांस और रूस की श्रेणी में आ जाएगा.

    इन देशों के पास पहले से ही इस तरह के जहाज हैं. चीन की नौसेना इस समय हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सक्रिय है और भारत इसका केंद्र बिंदु है. आईएनएस ध्रुव, चीनी नौसेना के बढ़ते कदमों पर ब्रेक लगाने का जरिया है.

    दिल्‍ली, मुंबई रहेंगे हर हमले से सुरक्षित

    15,000 टन का यह जहाज हिंद महासागर में भारत के रक्षा घेरे को मजबूत करेगा. बड़े भारतीय शहरों और मिलिट्री संस्‍थानों की तरफ आने वाली खतरनाक बैलेस्टिक मिसाइलों के हमलों को भी फेल करने का काम करेगा. इस जहाज को नेवी के लिए एक तरह का अर्ली वॉर्निंग सिस्‍टम करार दिया जा रहा है.

    सूत्रों की तरफ से बताया गया है कि आईएनएस ध्रुव के फाइनल चेक का काम विशाखापट्टनम में जारी है और इसके बाद इस साल इसे नौसेना को सौंप दिया जाएगा.

    एडवांस्‍ड रडार सिस्‍टम से लैस

    आईएनएस ध्रुव एक्टिव इलेक्ट्रिॉनिक स्‍कैन्‍ड एरे रडार्स या AESA से लैस है. AESA को रडार टेक्‍नोलॉजी में गेम चेंजर समझा जाता है. यह रडार अलग-अलग ऑब्‍जेक्‍ट्स का पता लगाने के साथ ही दुश्‍मन के उन सैटेलाइट्स पर भी नजर रखती है जो अंतरिक्ष से भारत की जासूसी करते हैं.

    इस रडार की मदद से किसी मिसाइल की क्षमता और उसकी रेंज का भी पता लगाया जा सकता है. आईएनएस ध्रुव महासागर पर भारत की सर्विलांस क्षमताओं में कई गुना तक इजाफा करने वाला हथियार साबित होगा. रक्षा विशेषज्ञों की मानें तो आईएनएस ध्रुव हिंद महासागर की ECG नौसेना को सौंपने वाला हथियार है.

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