क्या आपने किसी ऐसे राज्य के बारे में सुना है, जहां की सरकारी मशीनरी केवल सलाहकारों और बाहरी एजेंसियों की नियुक्ति करती हो और उस राज्य की सफाई व्यवस्था से लेकर उद्योग और व्यापार तक की नीतियां कंसल्टेंट तय करते हों। यकीनन आपने ऐसा नहीं सुना होगा, लेकिन झारखंड में पिछले 20 साल में यही होता रहा। तमाम संसाधन और अधिकारियों-कर्मचारियों की फौज उपलब्ध रहने के बावजूद पिछले 20 साल में झारखंड सरकार ने अपना सारा काम बाहरी एजेंसियों और कंसल्टेंट कंपनियों को दे दिया। झारखंड पर यह शिकंजा इतना
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