नजीटी कानून लागू हो या सरकार का सख्त नियम हो, इन बालू माफिया को इनसे कोई लेना देना नहीं। इनका एक मात्र मिशन होता है, नदियों से बालू खोदो, असली नकली चालान दो और जैसे भी हो बेचकर लाखों कमाओ। अगर आंकड़ों पर गौर करें तो ये माफिया हर दिन करीब 50 लाख के राजस्व का चूना सरकार के खजाने को लगा रहे हैं। दुमका जिले में हर बालू घाट पर झारखंड