झारखंड में तीसरे चरण के मतदान के साथ ही 81 में से 50 सीटों पर चुनाव पूरा हो गया है। अब दो चरणों में बाकी बची 31 सीटों पर 16 और 20 दिसंबर को मतदान होगा। मतदाताओं के फैसले की जानकारी 23 दिसंबर को मिलेगी। इस चुनाव की सबसे खास बात यह है कि यह चुनाव पूरी तरह भाजपा बनाम विपक्ष के रूप में देखा जा रहा है। इन 81 सीटों में से 10 सीटें ऐसी हैं, जिनके परिणाम पर पूरे देश की निगाहें हैं। इनमें से पांच सीटों पर मतदान हो चुका है। इनके बारे में जितने मुंह उतनी बातें सुनने को मिल रही हैं। जमशेदपुर पूर्वी सीट पर कयासों और अटकलबाजियों की सबसे अधिक जुगलबंदी सुनाई दे रही है। उसी तरह सिल्ली सीट पर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। इसी तरह कोडरमा, पांकी और विश्रामपुर के संभावित चुनाव परिणामों के बारे में जोड़-घटाव किये जा रहे हैं। चौथे और पांचवें चरण की जिन सीटों के बारे में जीत-हार की चर्चा सबसे अधिक है, उनमें झरिया, चंदनकियारी, बाघमारा, दुमका और पाकुड़ सीट है। झरिया में जेठानी और देवरानी के बीच मुकाबला है, वहीं बाघमारा में दो दबंग आमने-सामने हैं। दुमका में हेमंत और लुईस मरांडी के बीच जंग है तथा पाकुड़ मेेंं आलमगीर आलम तथा अकील अख्तर की साख दांव पर है। चंदनकियारी सीट पर अमर बाउरी और आजसू के उमाकांत रजक के बीच फाइट टाइट है। जैसे रात के आकाश में लाखों तारों के बीच चमक रहे एक चांद की चर्चा अधिक होती है, वैसे ही झारखंड विधानसभा की 81 सीटों में से इन दस सीटों पर हार-जीत के समीकरणों को समझने की रुचि हरेक झारखंडी में स्वाभाविक रूप से है। इन सीटों पर मुख्य उम्मीदवारों और उनकी टक्कर से निर्मित हुई परिस्थितियों की पड़ताल करती दयानंद राय की रिपोर्ट।