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    Home»Breaking News»रूस-यूक्रेन युद्ध से सबक लेकर भारतीय सेना और बढ़ाएगी अपने हथियारों का भंडार
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    रूस-यूक्रेन युद्ध से सबक लेकर भारतीय सेना और बढ़ाएगी अपने हथियारों का भंडार

    azad sipahiBy azad sipahiSeptember 17, 2023No Comments3 Mins Read
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     सेना ने और अधिक होवित्जर, रॉकेट और मिसाइलों की जरूरत जताई
     दुश्मनों पर सटीक हमले वाले हथियार बढ़ाने के सेना ने शुरू किए प्रयास

    नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध से सबक लेकर भारत की सेना ने मौजूदा हथियार भंडार से ज्यादा होवित्जर, रॉकेट और मिसाइलों की जरूरत जताई है। इसके लिए विरोधियों के खिलाफ सटीक हमले की क्षमता रखने वाले हथियारों को अपने बेड़े में शामिल करने के लिए सेना ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। भारत आने वाले दिनों में और अधिक हॉवित्जर, मिसाइलों और रॉकेटों के साथ-साथ युद्ध सामग्री, झुंड ड्रोन को शामिल करने जा रहा है।

    रूस के साथ यूक्रेन युद्ध में उच्च मात्रा में विनाशकारी गोलाबारी को निर्णायक युद्ध जीतने वाला कारक माना गया है। इसीलिए भारतीय सेना की तोपखाने रेजिमेंटों के लिए लगभग 300 स्वदेशी उन्नत टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएजीएस) और 155 मिमी/52-कैलिबर बंदूकों के 300 माउंटेड गन सिस्टम (एमजीएस) की खरीद के लिए पहले ही अनुरोध पत्र (आरएफपी) जारी किये जा चुके हैं। अब सेना एलएंडटी और दक्षिण कोरियाई हनवा डिफेंस के संयुक्त उद्यम के माध्यम से 100 के-9 वज्र स्वचालित ट्रैक वाली बंदूकें हासिल करने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है, जिनकी मारक क्षमता 28-38 किमी. है।

    पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ जारी सैन्य टकराव के कारण पहले ही 4,366 करोड़ रुपये में शामिल की गई 100 ऐसी तोपों में से के-9 वज्र रेजिमेंट को ‘विंटराइजेशन किट’ के साथ वहां तैनात किया जा रहा है। सेना ने 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर नए एम-777 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर तोपों के साथ-साथ पुरानी बोफोर्स तोप, गन धनुष और सारंग तोपों को भी तैनात किया है। रूसी-यूक्रेन युद्ध से सबक लेकर संशोधित तोपखाना आधुनिकीकरण योजना के तहत भारत अधिक घुड़सवार और स्वचालित बंदूकों को हासिल कर रहा है। डीआरडीओ में विकसित एटीएजीएस के लिए अनुबंध किया जाना है, जिसकी अधिकतम मारक क्षमता 48 किलोमीटर है।

    इसी तरह सेना ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की अधिक रेजिमेंटों को शामिल करने की योजना बना रही है, जिनकी मारक क्षमता 290 किलोमीटर से बढ़ाकर 450 किलोमीटर कर दिया गया है। ब्रह्मोस का 800 किलोमीटर वाला संस्करण भी विकसित किया जा रहा है। सेना के लिए 150 से 500 किलोमीटर की दूरी तक मारक क्षमता वाली परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल ‘प्रलय’ के शुरुआती 100 ऑर्डर को अंतिम रूप दिया जा चुका है, जो जल्द ही सेना को मिल सकती हैं। इसके अलावा आर्टिलरी रेजिमेंटों को बंदूकों, मिसाइलों और रॉकेटों की आवश्यकता है। नतीजतन, सेना जल्द ही स्वदेशी पिनाका मल्टी-लॉन्च आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम की कम से कम छह और रेजिमेंटों को धीरे-धीरे शामिल करना शुरू कर देगी।

    स्वदेशी पिनाका मल्टी-लॉन्च आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम की चार रेजिमेंट को एलएसी पर तैनात किया गया है। पिनाका रॉकेट की स्ट्राइक रेंज को भी मूल 38 किमी. से 75 किमी. तक बढ़ा दिया गया है। डीआरडीओ अब इनकी मारक क्षमता को 120 से 300 किमी. तक बढ़ाने की भी संभावना तलाश रहा है। इसके अलावा आपातकालीन खरीद के तहत स्ट्राइक लोइटरिंग मूनिशन की भी खरीद प्रक्रिया शुरू की गई है। तोपखाना इकाइयों के चल रहे पुनर्गठन में सामरिक दूर से संचालित विमान, लोइटर हथियार सिस्टम, झुंड ड्रोन, नवीनतम हथियार-पता लगाने वाले रडार शामिल होंगे।

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