रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि उनकी सरकार बच्चों को शिक्षित करने के साथ हुनरमंद भी बनायेगी, ताकि उन्हें रोजगार तलाशने में सहूलियत हो। वह शुक्रवार को अपने आवास पर मिलने आये बाल पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बाल पत्रकार की परिकल्पना अच्छी है। बाल पत्रकारों के समक्ष चुनौती आसान नहीं है। इसे आसान बनाने के लिए हमें मिलकर प्रयास करना होगा। लॉकडाउन में लोगों के साथ बच्चों को भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इन समस्याओं के समाधान के लिए लगातार चिंतन-मंथन हो रहा है। स्कूल के पाठ्यक्रम में कटौती की गयी है। समय बदल रहा है। अब शिक्षा का महत्व है। इसलिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से बच्चे आच्छादित हों, इस दिशा में सरकार कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियों की शिक्षा को लेकर सरकार संवेदनशील है। अगर एक बेटी शिक्षित होती है, तो आने वाली पीढ़ी भी स्वाभाविक रूप से सशक्त होगी। सीएम ने कहा कि बाल पत्रकारों का प्रयास सराहनीय है। बच्चों के पाठ्यक्रम में बाल विवाह, बाल श्रम कानून से संबंधित जानकारी भी होनी चाहिए, ताकि बच्चों के साथ उनके अभिभावक भी कानूनों के संबंध में जान सकें। कई अभिभावक गरीबी की वजह से बच्चों को बेच देते हैं। यह दुखद है। सरकार ने कानून बनाया है। बाल विवाह, बाल मजदूरी गुनाह है। यह गुनाह तब तक यदा-कदा होता रहेगा, जब तक गरीब गरीबी से बाहर नहीं निकल जाता। वर्तमान सरकार ऐसे परिवारों को गरीबी से बाहर लाने के लिए प्रयासरत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ हुनरमंद बनाने की कार्य योजना पर भी कार्य हो रहा है, ताकि उन्हें रोजगार तलाशने में सहूलियत हो। शिक्षा प्राप्त करने के साथ रोजगार प्राप्त करना भी एक चुनौती होती है। शिक्षा के बाद अगर रोजगार नहीं मिलता है, तो युवा अवसाद से ग्रसित हो जाते हैं। वहीं अगर हाथों में हुनर होगा, तो वे अपने रोजगार का मार्ग प्रशस्त कर सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूनिसेफ बाल पत्रकारों के सहयोग से मैगजीन तैयार करे। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग बाल पत्रकारों की सोच अन्य बच्चों तक संप्रेषित करने में सहयोग करेगा।
सीएम को बाल पत्रकारों ने दी जानकारी
मुख्यमंत्री को बाल पत्रकार वंशिका कुमारी ने बच्चों के द्वारा कोरोना संक्रमण के दौरान किये गये कार्यों, फरहीन परवीन ने बाल विवाह, रुकसार परवीन ने बाल श्रम से मुक्त कराये गये बच्चों और उन्हें पढ़ाई से जोड़ने के साथ कोविड 19 के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के संदर्भ में दीपा कुमारी-मोहम्मद कैफ ने अवगत कराया। मौके पर यूनिसेफ के झारखंड प्रमुख प्रशांता दास, संचार अधिकारी आस्था अलंग समेत कई अन्य उपस्थित थे।
क्या है बाल पत्रकार कार्यक्रम
यूनिसेफ झारखंड में 2009 से बाल पत्रकार कार्यक्रम संचालित कर रहा है। इस वर्ष रांची के पांच प्रखंडों के 550 से अधिक बाल पत्रकारों को बाल अधिकारों के बारे में जानकारी के साथ प्रशिक्षण दिया गया है। ये बच्चे पोषण, स्वास्थ्य, बाल विवाह, बाल श्रम, शिक्षा आदि को लेकर समाज में जागरूकता फैला रहे हैं। कोरोना संक्रमण के दौरान भी कई बच्चों ने आगे बढ़कर लोगों की मदद की और महामारी के बारे में लोगों को जागरूक किया। अब तक 20 हजार से अधिक बच्चे बाल पत्रकार कार्यक्रम से जुड़े हैं।
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