नई दिल्ली। राजधानी नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है। सम्मेलन में BRICS और सहयोगी देशों के 21 देशों के शीर्ष नेता एवं प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा और युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलुपो समेत कई प्रमुख नेता नई दिल्ली पहुंच चुके हैं।
शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें होनी हैं। सम्मेलन के मद्देनजर राजधानी में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
मोदी ने BRICS देशों से तय लक्ष्य पर काम करने का आह्वान
BRICS बिजनेस फोरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत की BRICS अध्यक्षता की थीम ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ है। उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले वर्षों में अपनी आर्थिक और व्यापार नीतियों के जरिए आपूर्ति शृंखलाओं को अधिक विविध और भरोसेमंद बनाने पर काम किया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत सड़क, रेलवे, बंदरगाह और हवाई अड्डों के साथ जहाज निर्माण, सेमीकंडक्टर, क्वांटम तकनीक, महत्वपूर्ण खनिज और जैव प्रौद्योगिकी जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में अपनी क्षमता बढ़ा रहा है।
उन्होंने BRICS बिजनेस काउंसिल से हर साल समूह की प्रगति की समीक्षा करने का सुझाव दिया। मोदी ने व्यापार की शीर्ष 10 बाधाओं को दूर करने, हर साल 100 BRICS स्टार्टअप को दूसरे सदस्य देशों के बाजारों में विस्तार में मदद करने और कारोबारों के बीच 1,000 नई साझेदारियां बनाने जैसे लक्ष्य तय करने की बात कही।
भारत को बताया अवसरों का नया केंद्र
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का दृष्टिकोण व्यापारिक बाधाओं को कम करने और कारोबार के लिए नए अवसर पैदा करने पर केंद्रित है। उन्होंने समुद्री मार्गों की सुरक्षा और आपूर्ति शृंखलाओं को खुला रखने को वैश्विक व्यापार के लिए जरूरी बताया।
मोदी के मुताबिक, 2006 में चार देशों से शुरू हुआ BRICS अब सहयोगी देशों समेत 21 देशों का परिवार बन चुका है। उन्होंने कहा कि BRICS देश दुनिया की करीब 50 प्रतिशत आबादी, लगभग 40 प्रतिशत वैश्विक GDP और वैश्विक व्यापार के 25 प्रतिशत से अधिक हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं।
पुतिन ने पश्चिमी देशों पर साधा निशाना
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने BRICS बिजनेस फोरम में कहा कि सदस्य देशों के बीच आपसी संबंध और कारोबार लगातार मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर बड़े संरचनात्मक बदलाव हो रहे हैं और BRICS देश मिलकर कई चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।
पुतिन ने पश्चिमी देशों पर प्रतिस्पर्धा से बचने और प्रतिबंधों का सहारा लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद देश आगे बढ़ रहा है।
रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि पाइपलाइनों को नुकसान पहुंचाने, अंतरराष्ट्रीय परिवहन गलियारों को बाधित करने, समुद्री जहाजों को जब्त करने और प्रतिबंध लगाने जैसे कदम वैश्विक प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर रहे हैं।
पेजेशकियन ने भारत का जताया आभार
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने BRICS बिजनेस फोरम में भारत में सम्मेलन की मेजबानी के लिए सरकार और जनता का आभार जताया। उन्होंने BRICS सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की भी सराहना की।
पेजेशकियन ने कहा कि निजी क्षेत्र, कारोबारी संस्थान और उद्यमी BRICS के भीतर सहयोग की अवधारणा को वास्तविक आर्थिक साझेदारी में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय बेहद जटिल दौर से गुजर रही है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता, आपूर्ति शृंखला में व्यवधान और आर्थिक साधनों के जरिए राजनीतिक दबाव बढ़ने से देशों के सामने चुनौतियां बढ़ी हैं।
भारत-रूस संबंधों पर मोदी-पुतिन की अहम बैठक
BRICS Summit से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत मंडपम में द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का गर्मजोशी से स्वागत किया। बैठक में ऊर्जा, रक्षा, व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई।
पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को रूस आने का निमंत्रण दिया, जिसे मोदी ने स्वीकार किया। प्रधानमंत्री ने यूक्रेन संघर्ष को लेकर भारत का रुख दोहराते हुए कहा कि विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है। उन्होंने संघर्ष समाप्त कराने के प्रयासों में भारत की ओर से सहयोग की पेशकश भी की।
दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र के संघर्षों से समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर पड़ रहे प्रभाव पर भी चर्चा की।
इन मुद्दों पर बनी सहमति
मोदी ने बैठक के बाद बताया कि भारत और रूस के बीच आर्थिक सहयोग कार्यक्रम 2030 को लागू करने समेत व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने पर बातचीत हुई। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा, तकनीक, रक्षा, संस्कृति और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
दोनों नेताओं ने भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान वैश्विक कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों पर भी विचार-विमर्श किया।
निर्मला सीतारमण ने भारत के आलोचकों पर कसा तंज
इसी बीच ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत की आर्थिक प्रगति, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और युवा शक्ति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत अपने जनसांख्यिकीय लाभांश का प्रभावी इस्तेमाल कर रहा है और डिजिटल क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
वित्त मंत्री ने भारत की क्षमताओं पर सवाल उठाने वालों पर तंज कसते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तेमाल किए गए शब्द ‘नाराज फूफाजी’ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग भारत की विकास गति और युवाओं की क्षमता पर संदेह करने का कोई मौका नहीं छोड़ते।

