रांची। मुख्यमंत्री रघुवर दास पारा टीचरों की समस्या के समाधान के प्रति गंभीर हैं। उन्होंने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पारा टीचरों से अपील की कि वे काम पर लौट आयें। सरकार उनकी मांगों पर विचार कर रही है। नियुक्ति नियमावली के लिए सरकार ने उच्चस्तरीय समिति का गठन कर दिया है। शिक्षा मंत्री नीरा यादव के नेतृत्व में समिति बनायी गयी है। इसमें विकास आयुक्त डीके तिवारी, वित्त आयुक्त सुखदेव सिंह और शिक्षा सचिव एपी सिंह को शामिल किया गया है। उच्च स्तरीय समिति टेट पास अभ्यर्थियों की नियुक्ति के लिए नयी नियमावली बनाने पर विचार करेगी। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि पारा शिक्षकों की अन्य मांगों पर भी उच्च स्तरीय समिति विचारोपरांत विधिसम्मत अनुशंसा करे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने सभी पारा शिक्षकों से काम पर लौटने की अपील की है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार पारा शिक्षकों की मांगों पर गंभीर है और उनके हितों का हरसंभव खयाल रखा जायेगा।

मृत पारा शिक्षकों के आश्रितों को एक-एक लाख की मदद
मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि हाल के दिनों में कई पारा शिक्षकों के निधन की सूचना राज्य सरकार को प्राप्त हुई है। उन्होंने सभी के परिजनों को अपने विवेकाधीन कोष से 1-1 लाख रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि नियमावली बनने के बाद पारा शिक्षक कल्याण कोष से पारा शिक्षकों के आश्रितों को आर्थिक मदद की जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पारा टीचरों को राज्यहित और छात्र हित में अपना हड़ताल समाप्त कर काम पर लौट आना चाहिए। सरकार उनकी समस्याओं पर विचार कर रही है और इस दिशा में सम्मानजनक हल निकाला जायेगा।
पारा टीचरों का आग्रह
मानदेय नहीं, वेतनमान पर पुनर्विचार करें
इधर राज्य के पारा टीचरों ने मुख्यमंत्री की अपील के बाद उनसे विनम्र आग्रह किया है कि वे पारा टीचरों को वेतनमान देने पर पुनर्विचार करें। एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के संजय कुमार दुबे ने कहा है कि राज्य के 67 हजार पारा शिक्षकों की ओर से माननीय मुख्यमंत्री जी से आग्रह है कि वे अपने निर्णय पर पुनर्विचानर करें। राज्य के पारा शिक्षकों की मूल मांग कार्यानुभव के आधार पर वेतनमान है। अत: वेतनमान को केंद्र में रख कर नीतिगत निर्णय लिये जाने की आवश्यकता है। पारा शिक्षकों ने नेता सिंटू सिंह ने कहा है कि इससे पहले भी मई महीने में राज्य सरकार ने एक कमेटी बनायी थी। वरिष्ठ आइएएस अधिकारी केके खंडेलवाल की अध्यक्षता में बनी कमेटी में वित्त सचिव, शिक्षा सचिव, विधि सचिव, सर्व शिक्षा अभियान के सचिव और तीन शिक्षक प्रतिनिधियों को रखा गया था। उनमें शिक्षक प्रतिनिधि के रूप में बजरंग प्रसाद, सिंटू सिंह और ऋषिकेश पाठक शामिल थे। कमेटी को दो महीने के अंदर रिपोर्ट देनी थी। लेकिन कमेटी ने अपनी रिपोर्ट छह महीने में सौंपी। उस रिपोर्ट में ऐसा कुछ भी नहीं था, जिसमें पारा शिक्षकों का हित जुड़ा हो।

यह पहला अवसर है, जब मुख्यमंत्री रघुवर दास ने राज्य के पारा टीचरों से आग्रह किया है। उनके आग्रह में पारा टीचरों की समस्या के प्रति गंभीरता भी दिख रही है। उन्होंने उम्मीद जतायी है कि पारा टीचर उनकी अपील पर काम पर लौटेंगे और छात्रहित में अपना योगदान दें। बताते चलें कि 16 नवंबर से राज्य के 67 हजार पारा टीचर हड़ताल पर हैं।

वे छत्तीसगढ़ की तर्ज पर पारा टीचरों को समान काम के बदले समान वेतन देने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि सरकार जो पैसे उन्हें मानदेय के रूप में दे रही है, उस पैसे में घर-परिवार चलाना बहुत मुश्किल हो रहा है। अपनी मांगों को मनवाने के लिए पारा टीचरों ने आंदोलन की शृंखला बनायी है। इस क्रम में उन्होंने राज्य के सांसदों, विधायकों, मंत्रियों तक का दरवाजा खटखटाया है। वे राज्य के मंत्रियों के आवास के समक्ष धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं और विधायकों के दरवाजे-दरवाजे जाकर अपनी मांगों से उन्हें अवगत करा रहे हैं।

आंदोलन के क्रम में कई पारा शिक्षकों की मौत हो चुकी है। कोई ठंड के कारण मरा है, तो कोई आर्थिक तंगी के कारण अपना इलाज नहीं करा पाने के कारण। शिक्षकों ने उनके परिजनों को 25 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने की मांग की है। इधर विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान राज्य के सत्ता पक्ष और विपक्ष के तमाम विधायकों और नेताओं का साथ पारा टीचरों को मिला।

विधानसभा में हंगामा भी हुआ। सत्ता पक्ष के विधायकों के साथ-साथ सांसदों ने भी मुख्यमंत्री से मांग की है कि पारा टीचरों की समस्या का कोई न कोई हलं निकाला जाये। इसी के आलोक में दिसंबर के अंत में पारा टीचरों की शिक्षाा मंत्री के साथ बैठक भी हुई थी। उस बैठक में शिक्षा सचिव भी शामिल थे। इस बैठक में कोई सम्मानजनक हल नहीं निकल पाया था। बैठक के बाद पारा शिक्षकों ने कहा था कि उन्हें छत्तीसगढ़ की तर्ज पर वेतनमान दिया जाये। बैठक में शिक्षा मंत्री डॉ नीरा यादव ने उन्हें आश्वस्त किया था कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार कर रही है। उन्होंने भी पारा टीचरों से आग्रह किया था कि वे काम पर लौट आयें। उनके मानदेय में वृद्धि कर दी जायेगी। सरकार नियुक्ति नियमावली भी बनायेगी। उन्होंने कहा था कि शिक्षकों की समस्या के समाधान और उनकी मांगों पर वह मुख्यमंत्री रघुवर दास से बात करेंगी। उन्हें इससे अवगत करायेंगी। उसके बाद ही मुख्यमंत्री रघुवर दास ने शिक्षकों के नाम अपील जारी की है।
इधर पारा टीचरों की हड़ताल के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गयी है। हजारों स्कूलों में ताले लटके हैं। बच्चों की पढ़ाई बाधित हो गयी है। इसके साथ-साथ गरीबों के बच्चों को मिड डे मील भी नहीं मिल पा रहा है। बताते चलें कि गरीबों के बच्चों के लिए मिड डे मील बड़ा सहारा है। मिड डे मील के कारण ही बहुत सारे बच्चे पढ़ने के लिए स्कूल आते हैं।
मुख्यमंत्री की अपील के बाद यह उम्मीद की जानी चाहिए कि पारा टीचरों की हड़ताल का कोई न कोई समाधान अवश्य निकलेगा। पारा टीचरों को भी आत्ममंथन करने की जरूरत है।

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