दुमका। शिकारीपाड़ा में रविवार की सुबह पुलिस और नक्सलियों में मुठभेड़ हुई। इसमें दस लाख का इनामी कुख्यात सहदेव राय उर्फ ताला ढेर हो गया। वह एसपी अरमजीत बलिहार की हत्या समेत 50 से अधिक वारदातों में शामिल था। 2014 में प्रवीर उर्फ हिरेंद्र मुर्मू की गिरफ्तारी के बाद इस इलाके में संगठन की बागडोर नंदलाल मांझी संग सहदेव राय संभाल रहा था। एक नक्सली को गोली लगने की बात कही जा रही है। ताला की मौत पुलिस के लिए बड़ी सफलता है।

2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान पलासी में पांच पुलिस कर्मी समेत आठ लोगों की हत्या में भी ताला ने अहम भूमिका निभायी थी। सहदेव संथाल परगना का जोनल कमांडर था। अभी पुलिस का सर्च अभियान जारी है। पुलिस ने मौके से एक इंसास और एक एके-47 मिले हैं। एसपी वाइएस रमेश ने कहा कि मुठभेड़ के दौरान करीब 20 नक्सली थे, जिसमें कई को गोली लगने की संभावना है। मुठभेड़ के दौरान 500 राउंड फायरिंग हुई है। पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है।

एसपी वाइएस रमेश ने बताया कि कई जगहों पर खून के धब्बे मिले हैं। उनकी जांच की जा रही है। एसपी ने बताया कि ताला काठीकुंड के बड़ा सरुआपानी का रहने वाला था। उसके पिता बद्री ने ही क्षेत्र में नक्सलवाद की शुरुआत की। उसका भाई रामलाल राय जेल में बंद है।

राम लाल के जेल जाने के बाद ताला नक्सली गतिविधियों में शामिल हुआ था। बताया कि क्षेत्र में नक्सलियों के छिपे होने की सूचना मिली थी। खबर थी कि नक्सली किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए क्षेत्र में एकत्र हुए हैं। इसी सूचना के आधार पर एडिशनल एसपी एसएसबी और डिप्टी कमांडेंट के नेतृत्व में जवानों को सर्च आॅपरेशन के लिए भेजा गया। इसी दौरान पुलिस का नक्सली गुट से सामना हो गया। दोनों ओर से फायरिंग हुई, जिसमें भाकपा माओवादी का दुर्दांत नक्सली ताला मारा गया।

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