अजय शर्मा
रांची। झारखंड पुलिस आतंकियों को पासपोर्ट, फरजी प्रमाण पत्र देने में उदार है। बिना जांच किये यहां की पुुलिस यह प्रमाण देती रही है कि आवेदक झारखंड का रहनेवाला है। पूरे देश में कहीं किसी का पासपोर्ट नहीं बने तो झारखंड आइये और यहां से प्रमाण पत्र लेकर चले जाइये। चार दिन पहले जमशेदपुर से गिरफ्तार दाउद इब्राहिम का करीबी अब्दुल मजीद कट्टी को उसी शहर का निवासी बता दिया गया। वह पांच साल से जमशेदपुर में रह रहा था। उसे पुलिस की ओर से यह प्रमाण पत्र दे दिया गया कि वह यहीं का वासी है। बगैर जांच किये अब्दुल मजीद जमशेदपुर में मो कलाम बन गया। वह जिसके मकान में किरायेदार था, उसी ने उसे अपना भांजा बताया और पुलिस ने इसी आधार पर सर्टिफिकेट जारी कर दिया। गुजरात के एटीएस को अगर उसकी दूसरी पत्नी सच्चाई नहीं बताती, तो वह यहीं आराम से रहता। फिलहाल आरोपी पुलिस अधिकारी को बदल दिया गया है। डीआइजी राजीव रंजन सिंह ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिये हैं। जमशेदपुर एसएसपी ने जांच टीम गठित कर दी है। झारखंड में इसके पहले भी फरजी पासपोर्ट जारी किये जाने का मामला सामना आया है।
शेर सिंह राणा को मिला पासपोर्ट, तब चर्चा में आयी राजधानी पुलिस
सांसद फूलन देवी की हत्या के आरोपी शेर सिंह राणा को रांची से ही पासपोर्ट जारी हुआ था। डोरंडा पुलिस ने इसकी अनुशंसा की थी। इस मामले में उस समय के एसडीओ और पुलिस अधिकारियों को दोषी माना गया था। शेर सिंह राणा अफगानिस्तान गया था और वहां से पृथ्वी राज चौहान की मिट्टी और अस्थियां ले आया था। रांची पुलिस ने उसे संजय गुप्ता के नाम से पासपोर्ट जारी कर दिया था। तत्कालीन एसडीओ ने उसके गलत नाम पर पासपोर्ट जारी करने की अनुशंसा की थी। तत्कालीन एसडीओ विनय कुमार सिंकू को दोषी पाया गया था। तिहाड़ जेल से भागने के बाद शेर सिंह राणा ने संजय गुप्ता नाम से फर्जी पासपोर्ट बनवा लिया था।

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