आजाद सिपाही संवाददाता
भंडरिया/गढ़वा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि कुछ लोगो ने झारखंड में जंगल-पहाड़ों को डरावना बना दिया है। ये जंगल पहाड़ काफी काफी खूबसूरत हैं। ये जंगल-पहाड़ सुकून वाला घर है। हम भी ऐसे गांव हैं, इसी तरह के गांव में हम भी पले बढ़े हैं। बूढ़ा पहाड़ का ब्लू प्रिंट तैयार किया जा रहा है। अगले छह महीने में इलाके की तस्वीर बदल जाएगी। मुख्यमंत्री शुक्रवार को नक्सल प्रभावित बूढ़ापहाड़ इलाके में लोगो कों संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने बूढ़ा पहाड़ डेवलपमेंट प्लान की भी शुरूआत की।
झारखंड में पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने बूढ़ा पहाड़ का दौरा किया है। मुख्मयंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि मैं लंबे समय से इन इलाको में आना चाहता था। इन इलाकों की अनदेखी हुई है, यही वजह है कि नक्सलवाद इन इलाकों में पनपा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार हम हेलीकॉप्टर से आये हैं, अगली बार सड़क से आयेंगे। माओवादियों ने इस इलाके के सुनसान रहने और योजनाओं के यहां तक ना पहुंचने का लाभ उठाया है। अब लोगों को बंदूक उठाने की जरूरत नहीं है। आप सरकारी योजनाएं उठायें।
नक्सवाद खत्म करने में मदद करे केंद्र:
मुख्मयंत्री ने कहा कि राज्य में नक्सलवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। अभी इसी तरह अभियान चलता रहा और ऐसे प्रभावित क्षेत्रों के मदद के लिए केंद्र सरकार राज्य की मदद करती रहे तो और लाभ मिलेगा। हमने इस इलाके में सफलता हासिल की है। जीएसटी से मिलने वाला लाभ बंद है। ऐसे में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष प्रबंध केंद्र सरकार को करना चाहिए।
बूढ़ा पहाड़ में लौटेगी शांति:
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक वक्त था जब लोग खूबसूरत वादियों का आनंद लेते थे, लेकिन माओवादियों के द्वारा इस जगह को भयावह जगह बना दिया था। हमने इस क्षेत्र को सुरक्षित करने का लक्ष्य पहले से रखा था। इस लक्ष्य का ही नतीजा है कि आज यहां शांति और खुशहाली की नींव रखी जा रही है। मैं बहुत पहले से ही इस जगह पर आने के लिए प्रयास कर रहा था। मैं जानता था कि थोड़ा वक्त लगेगा आज नहीं तो कल मैं इस जगह जरूर आऊंगा। यहां के पहाड़ वादियां मेरे लिए नयी नहीं है। आज हम उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र में पहुंचे हैं। लंबे संघर्ष और कार्य योजना का यह परिणाम है कि आज यहां ग्रामीणों के सामने मुख्यमंत्री और सरकारी अधिकारी मौजूद हैं। इस वक्त उत्साह भरा माहौल है।
बूढ़ापहाड़ पर बनेगा शहीद स्मारक:
मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने कहा कि जिस तरह भारत की आजादी और अलग राज्य मिलने पर खुशी मिली थी। उसी प्रकार बूढ़ापहाड़ के नक्सल मुक्त होने पर मिली है। उन्होंने कहा कि बूढ़ापहाड़ अब नक्सल नहीं विकास के लिए जाना जाएगा। कार्यक्रम में मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, गृह सचिव राजीव अरुण एक्का, डीजीपी नीरज सिन्हा, सीएम के प्रधान सचिव विनय चौबे, एडीजे संजय आनंद लाटकर, सीआरपीएफ आइजी अमित कुमार, पलामू आइजी राजकुमार लकड़ा समेत अन्य अधिकारी मौजबद थे। डीजीपी नीरज सिन्हा ने घोषणा की कि बूढ़ापहाड़ पर शहीद जवानों का स्मारक बनाया जाएगा। इसका प्रस्ताव सीएम को दिया गया है। डीजीपी ने कहा कि बूढ़ापहाड़ अभियान के दौरान पिछले कुछ वर्षों में 58 जवान शहीद हुए हैं। जबकि 42 ग्रामीणों की माओवादियो ने हत्या की है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में 1319 नक्सली गिरफ्तार हुए हैं। जबकि 31 मारे गये हैं। बूढ़ापहाड़ अभियान आॅक्टोपस और डबल बुल के कारण माओवादी कमजोर हुए हैं। अब बूढ़ापहाड़ नक्सल मुक्त हो रहा है।
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