काठमांडू। जेन जी आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) की समानुपातिक प्रतिनिधित्व (पीआर) सूची को लेकर गहरी असंतुष्टि व्यक्त की है। उनका कहना है कि यह सूची संविधान की भावना और समावेशी प्रतिनिधित्व के मूल उद्देश्य के खिलाफ है।
कार्यकर्ताओं का तर्क है कि भाई-भतीजावाद, पक्षपात और ‘नेपो-बेबीज़’ के खिलाफ खड़े हुए आंदोलन ने खुद अपने आदर्शों से समझौता कर लिया है, क्योंकि सूची में ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर रहे समुदायों के बजाय पहुंच, धन और निजी संबंध रखने वाले लोगों को प्राथमिकता दी गई है। उनके अनुसार रवि लामिछाने, काठमांडू महानगर के मेयर बालेन शाह और ऊर्जा मंत्री कुलमान घिसिंग के बीच राजनीतिक तालमेल के बाद इस सूची का इस्तेमाल ‘अपने लोगों’ की सिफारिश के लिए किया गया।
जेन जी कार्यकर्ताओं का कहना है कि अलग ढंग की राजनीति करने के वादे के साथ उभरी आरएसपी ने भी नेपाली कांग्रेस और सीपीएन-यूएमएल की ही राह अपनाई है, जहां बहुत कम सामाजिक-राजनीतिक योगदान वाले कारोबारी परिवारों को प्राथमिकता दी जा रही है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी पिछड़े वर्गों, वंचित क्षेत्रों और समुदायों को सार्थक रूप से शामिल करने में विफल रही है, जिससे समानुपातिक प्रणाली की संवैधानिक मंशा कमजोर हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सूची में सुधार नहीं किया गया, तो वे समानुपातिक प्रणाली के तहत मतदान से परहेज करेंगे।
जेन जी कार्यकर्ता तनुजा पांडे ने आरएसपी पर पारंपरिक दलों की नकल करने का आरोप लगाया। फेसबुक पर लिखते हुए उन्होंने कहा कि लोकप्रियता, पहुंच और निजी नेटवर्क को तरजीह देने से पुराने और नए दलों के बीच कोई फर्क नहीं रह गया है। उन्होंने यह भी कहा कि समानुपातिक प्रतिनिधित्व ऐतिहासिक रूप से वंचित समुदायों के संघर्ष और बलिदान से स्थापित हुआ था, इसे सत्ता, धन या नाम-पहचान पाने का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए। पांडे के अनुसार, कभी जब डॉ. आरजू राणा देउबा जैसी हस्तियां पीआर के जरिए संसद पहुंची थीं तो वह शर्मनाक था, और आज नए दलों का वही प्रवृत्ति दोहराना उतना ही निराशाजनक है।
एक और जेन जी कार्यकर्ता भावना राउत ने कहा कि यदि सूची में बदलाव नहीं हुआ तो जेन जी मतदाता समानुपातिक प्रणाली के तहत आंख मूंदकर वोट नहीं देंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्यक्ष चुनाव में वोट उम्मीदवार के आधार पर होगा, जबकि समानुपातिक वोट उन दलों को नहीं दिया जाएगा जो नैतिक मानकों पर खरे नहीं उतरते। उन्होंने लिखा, “मैं चाहती हूं कि आरएसपी एक बड़ी पार्टी बने और बालेन प्रधानमंत्री बनें, लेकिन मैं अंधी निष्ठा के लिए अपने नैतिक मूल्यों का सौदा नहीं कर सकती।” उन्होंने कहा कि सवाल उठाना और पार्टियों को जवाबदेह बनाना लोकतंत्र की अनिवार्य शर्त है।

