नई दिल्ली। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को आर्थिक संबल देने के उद्देश्य से शुरू की गई केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीेएमएमवीवाई) के तहत पिछले आठ वर्षों में सवा 4 करोड़ से अधिक महिलाओं को मदद दी गई। योजना की शुरुआत से 8 जनवरी 2026 तक 4.26 करोड़ महिलाओं को 20,060 करोड़ रुपये की मातृत्व सहायता प्रदान की जा चुकी है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस योजना के प्रगति की समीक्षा की थी जिसमें बताया गया कि तकनीकी सुधारों के बाद इस योजना के क्रियान्वयन को और मजबूत किया है। डिजिटल निगरानी, फेशियल रिकग्निशन सिस्टम और ड्यू लिस्ट जैसी व्यवस्थाओं से न केवल पात्र लाभार्थियों तक समय पर मदद पहुंच रही है, बल्कि फर्जीवाड़े पर भी प्रभावी रोक लगी है।

पीएमएमवीवाई 01 जनवरी 2017 से देशभर में लागू है। इसके तहत पहले बच्चे के जन्म पर 5,000 रुपये और दूसरे बच्चे के जन्म पर (यदि बच्ची हो) 6,000 रुपये की सहायता राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से दी जाती है। मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक 59.19 लाख लाभार्थियों को 2,022.08 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।

मंत्रालय ने बताया कि 21 मई 2025 से पीएमएमवीवाई के तहत नए पंजीकरण के लिए चेहरे की पहचान प्रणाली के जरिए बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। यह सुविधा पोषण ट्रैकर के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है। अब तक 23.60 लाख से अधिक महिलाओं का नामांकन इसी प्रणाली से किया जा चुका है। इससे यह सुनिश्चित हो रहा है कि योजना का लाभ केवल वास्तविक और पात्र महिलाओं को ही मिले। यह व्यवस्था अब देश के 740 से अधिक जिलों में लागू हो चुकी है।

लाभार्थियों को खुद दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए पोषण ट्रैकर के डेटा के आधार पर संभावित लाभार्थियों की ‘ड्यू लिस्ट’ तैयार की जा रही है। यह सूची आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को उपलब्ध कराई जाती है, जो घर-घर जाकर पात्र महिलाओं का पंजीकरण कर रही हैं।

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