काठमांडू। नेपाल में आगामी पांच मार्च को होने वाले आम चुनाव के बाद गठित होने वाली प्रतिनिधि सभा में बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है। मौजूदा संसद के लगभग दो-तिहाई सांसद नई संसद में नजर नहीं आएंगे। सितंबर में भंग हुई प्रतिनिधि सभा के करीब 170 सांसद इस बार चुनावी मैदान में ही नहीं उतरे हैं, जिससे नए चेहरों के संसद में पहुंचने की संभावना काफी बढ़ गई है।

चुनावी विश्लेषकों के अनुसार, यदि चुनाव लड़ रहे सभी निवर्तमान सांसद भी जीत जाएं, तब भी नई प्रतिनिधि सभा में प्रत्यक्ष और समानुपातिक प्रणाली के तहत दो-तिहाई से अधिक नए सांसदों का आना लगभग तय माना जा रहा है। संघीय संसद के पूर्व महासचिव मनोहरप्रसाद भट्टराई का कहना है कि उम्मीदवारों की सूची और उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि को देखते हुए स्पष्ट है कि संसद में व्यापक बदलाव होगा।

प्रत्यक्ष प्रणाली के तहत 165 निवर्तमान सांसदों में से 70 इस बार उम्मीदवार ही नहीं हैं। वहीं समानुपातिक प्रणाली से चुने गए 110 सांसदों में से केवल करीब 10 ही चुनावी दौड़ में शामिल हैं। वर्ष 2022 में निर्वाचित हुए लगभग 100 सांसद दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन उनकी जीत की कोई गारंटी नहीं मानी जा रही।

इस चुनाव में कई शीर्ष नेता भी मैदान से बाहर हैं। नेपाली कांग्रेस के निवर्तमान अध्यक्ष शेरबहादुर देउवा, उपाध्यक्ष धनराज गुरुङ और विश्वप्रकाश शर्मा चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। वहीं सीपीएन-यूएमएल के भी कई बड़े नेताओं को टिकट नहीं मिला है, जिससे पार्टी के भीतर भी बड़ा बदलाव दिख रहा है।

कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में निवर्तमान सांसद आपस में ही आमने-सामने हैं। झापा–2, सर्लाही–4, धनुषा–3 और जुम्ला जैसे क्षेत्रों में कड़ी टक्कर है, जहां कई मौजूदा सांसदों का संसद से बाहर होना तय माना जा रहा है।

समानुपातिक सूची में भी व्यापक बदलाव किया गया है। प्रमुख दलों ने इस बार नए चेहरों को प्राथमिकता दी है, जिससे यह चुनाव नेपाल की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।

Share.

Comments are closed.

Exit mobile version