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    Home»विशेष»सही मायने में ग्लोबल आदिवासी नेता बन गये हेमंत सोरेन
    विशेष

    सही मायने में ग्लोबल आदिवासी नेता बन गये हेमंत सोरेन

    shivam kumarBy shivam kumarJanuary 23, 2026Updated:January 24, 2026No Comments8 Mins Read
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    विशेष
    दावोस में विश्व आर्थिक मंच में भी सुनी गयी झारखंड की धमक
    निवेशकों ने झारखंड का औद्योगिक और सांस्कृतिक महत्व समझा
    हजारों करोड़ के निवेश के प्रस्ताव के साथ दुनिया ने सुनी दमदार आवाज

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दावोस की अपनी यात्रा खत्म कर लंदन पहुंच चुके हैं। स्विटजरलैंड के दावोस शहर में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) की बैठक में पहली बार झारखंड ने उपस्थिति दर्ज करायी है। वास्तव में इस यात्रा ने मुख्यमंत्री को एक ग्लोबल आदिवासी नेता के रूप में स्थापित कर दिया है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के अलावा दूसरे महत्वपूर्ण बैठकों में उनका संबोधन और दुनिया भर के उद्योग जगत के अग्रणी हस्तियों और निवेशकों से मुलाकात के दौरान उनके दृष्टिकोण और सोच ने उन्हें एक विजनरी मुख्यमंत्री के रूप में स्थापित कर दिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में दावोस गये झारखंड के प्रतिनिधि मंडल ने वास्तव में पूरी दुनिया में झारखंड की औद्योगिक और सांस्कृतिक क्षमता का डंका बजा दिया है। किसी भी राज्य के लिए यह एक बड़ी उलब्धि है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जिस तरह दावोस में झारखंड की बात रखी और जिस तरह इसकी विकास यात्रा की रूपरेखा पेश की, उसकी हर तरफ सराहना हो रही है। उनकी यात्रा के बाद झारखंड में हजारों करोड़ के निवेश की संभावनाएं बन गयी हैं, जो झारखंड के लिए सुखद संकेत है। इन संभावनाओं को यदि एक तरफ रख भी दिया जाये, तो इतना तो तय हो गया है कि झारखंड का डंका पूरी दुनिया में बजने लगा है और अपनी प्राकृतिक समृद्धि के लिए प्रसिद्ध झारखंड अब किसी परिचय का मोहताज नहीं रह गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दावोस यात्रा से झारखंड को क्या हासिल हुआ, बता रहे हैं आजाद सिपाही के संपादक राकेश सिंह।

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्विटजरलैंड के दावोस की अपनी यात्रा समाप्त कर लंदन पहुंच गये हैं। अपने दावोस प्रवास के दौरान उन्होंने विश्व आर्थिक मंच में शामिल होकर झारखंड को न केवल वैश्विक पहचान बनायी, बल्कि खुद को एक ग्लोबल आदिवासी नेता के रूप में भी स्थापित कर लिया। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में झारखंड एक ‘इनवेस्टमेंट हब’ के रूप में उभर कर सामने आया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वैश्विक उद्योग समूहों के साथ उच्च स्तरीय बैठकें कर राज्य में औद्योगिक विकास, कृषि और कौशल विकास के नये रास्ते खोले हैं। झारखंड में पूंजी निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हुई दावोस यात्रा के दौरान हेमंत सोरेन ने वैश्विक मंच पर झारखंड की संभावनाओं, संसाधनों और निवेश के अवसरों को सामने रखा। मुख्यमंत्री के संबोधन के बाद न सिर्फ उद्योग जगत में, बल्कि इंटरनेट मीडिया पर भी इसकी व्यापक चर्चा शुरू हो गयी है। खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के भाषण की शैली, भाषा और संतुलन की खूब सराहना हो रही है और इसे सकारात्मक नेतृत्व का उदाहरण बताया जा रहा है। एक और खास बात यह रही कि हेमंत सोरेन ने कहीं भी झारखंड की राजनीति को बीच में नहीं आने दिया। उन्होंने कभी भी केंद्र सरकार के खिलाफ कोई बात नहीं कही। इसलिए दावोस में हेमंत सोरेन के संबोधन को एक अलग दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने मंच से भारत सरकार का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें पहली बार दावोस आने का अवसर मिला है। उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य, 2027 तक की दिशा और उसमें झारखंड की भूमिका पर स्पष्ट और संतुलित बात रखी।

    इंटरनेट मीडिया पर तारीफ, सकारात्मक राजनीति की मिसाल
    झारखंड की चर्चित शख्सियत कंचन उगुरसंडी, जिन्हें ‘बॉर्डर गर्ल’ और ‘बाइक गर्ल’ के नाम से जाना जाता है, ने एक्स पर मुख्यमंत्री की खुल कर सराहना की। उन्होंने लिखा कि चाहे कितनी भी आलोचना की जाये, सीएम हेमंत सोरेन में ऐसी कई खूबियां हैं, जो उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती हैं। उन्होंने लिखा है, देश के भीतर भले ही वे केंद्र की भाजपा सरकार से राजनीतिक टकराव में रहते हों, लेकिन दावोस जैसे वैश्विक मंच पर उन्होंने भारत सरकार और सहयोगी मंत्रियों के साथ तालमेल दिखाया और सरकार का आभार व्यक्त किया। उनके अनुसार मुख्यमंत्री के संबोधन में सकारात्मकता, दृढ़ता, आत्मविश्वास, सादगी और देश के प्रति सम्मान साफ झलकता है। यही कारण है कि सोशल मीडिया पर लोग उनकी तुलना करते हुए कह रहे हैं कि वैश्विक मंचों पर इस तरह का संतुलित और मर्यादित दृष्टिकोण देश और राज्य-दोनों के हित में है।

    झारखंड में निवेश के कई प्रस्ताव
    मुख्यमंत्री के दावोस प्रवास के दौरान झारखंड में बड़े निवेश प्रस्ताव मिले हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्लास्टिक उद्योग, लॉजिस्टिक्स, क्रिटिकल मिनरल्स और रिटेल सेक्टर में सैकड़ों करोड़ रुपये के निवेश की संभावनाओं को लेकर वैश्विक उद्योग समूहों के साथ अहम बैठकें कीं। इन बैठकों में न सिर्फ औद्योगिक निवेश, बल्कि किसानों और स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर भी सहमति बनी। टाटा समूह के अलावा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से दुनिया की कई प्रमुख कंपनियों के प्रमुखों ने मुलाकात की। रिटेल आउटलेट कंपनी लूलू ग्रुप के साथ वेलस्पन, इंफोसिस और ब्लूमबर्ग के प्रमुखों के साथ सीएम हेमंत ने बैठक कर झारखंड की औद्योगिक क्षमता सामने रखी। इस दौरान झारखंड के कृषि आधारित उत्पादों, वनोत्पादों और स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार वस्तुओं को लूलू ग्रुप की अंतरराष्ट्रीय वैल्यू चेन से जोड़ने पर चर्चा हुई। लूलू ग्रुप ने झारखंड के उत्पादों को आउटसोर्स कर देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचाने में रुचि जतायी है, जिससे किसानों और एसएचजी से जुड़ी महिलाओं को सीधा लाभ मिलने की संभावना है। समूह ने झारखंड में क्षमता निर्माण के क्षेत्र में भी काम करने की इच्छा जतायी है। आगे की संभावनाओं को लेकर लूलू ग्रुप का उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल जल्द झारखंड का दौरा करेगा। राज्य सरकार का प्रयास है कि झारखंड लूलू ग्रुप का प्रारंभिक आपूर्तिकर्ता बने।

    रोडमैप ‘विजन 2050’ की सराहना
    दावोस में झारखंड के दीर्घकालिक विकास रोडमैप ‘विजन 2050’ को भी सराहना मिली। विप्रो लिमिटेड के पूर्व चेयरमैन और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के चेयरमैन अजीम प्रेमजी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में ‘प्रकृति के साथ सामंजस्य में विकास’ की सोच की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि झारखंड गंभीर और संगठित प्रयासों के साथ आगे बढ़ रहा है। अजीम प्रेमजी फाउंडेशन द्वारा रांची के इटकी में एक विश्वविद्यालय, 1300 बेड का अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और स्कूल की स्थापना की जा रही है, जो राज्य में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ी पहल है।

    जयंत सिन्हा ने की सीएम की तारीफ
    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दावोस यात्रा कितनी सफल रही, इसका अंदाजा हजारीबाग के पूर्व भाजपा सांसद जयंत सिन्हा के पोस्ट से मिल जाता है। जयंत सिन्हा ने मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर लिखा, दावोस में विश्व आर्थिक मंच के दौरान झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी से मुलाकात हुई। इस दौरान झारखंड के आर्थिक विकास और राज्य में वैश्विक निवेश को आकर्षित करने को लेकर सार्थक चर्चा हुई। हमारी बातचीत का केंद्र यह रहा कि झारखंड को देश और दुनिया के सामने एक सशक्त, विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी निवेश गंतव्य के रूप में कैसे स्थापित किया जाये। उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग, खनन, ग्रीन एनर्जी और उभरते क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर भी विचार हुआ। विश्व के अन्य देशों की तरह भारत भी जलवायु परिवर्तन की एक गंभीर चुनौती का सामना कर रहा है। इसके लिए ग्रीन इन्वेस्टमेंट और क्लाइमेट फाइनेंस को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है। झारखंड और भारत में विदेश से निवेश बढ़ाकर पर्यावरण के अनुकूल तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास को गति दी जा सकती है। हजारीबाग और झारखंड के मेरे परिवारजनों के लिए यह चर्चा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि वैश्विक निवेश का सीधा लाभ जमीन पर दिखाई देता है। नये उद्योग, बेहतर रोजगार, मजबूत स्थानीय अर्थव्यवस्था और विकास के नये अवसर सृजित होंगे। दावोस जैसे वैश्विक मंच पर झारखंड की सक्रिय उपस्थिति यह स्पष्ट संकेत है कि हमारा राज्य अब केवल संभावनाओं की भूमि नहीं, बल्कि विकास और निवेश की ओर पूर्ण रूप से अग्रसर है। मैं झारखंड के उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर प्रयासरत हूं, ताकि हमारा राज्य और हमारा हजारीबाग, दोनों विकास की नयी ऊंचाइयों तक पहुंचे।

    सही मायने में ग्लोबल आदिवासी नेता
    दावोस प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी जो छवि बनायी है, उससे यह साफ हो गया है कि वह सही मायने में ग्लोबल आदिवासी नेता हैं। हालांकि उन्होंने इस यात्रा को राजनीतिक उद्देश्य से दूर रखा, लेकिन यात्रा के दौरान पक्ष और विपक्ष के बीच खूब बयानबाजी हुई। इस बात में कोई संदेह नहीं है कि हेमंत सोरेन को एक स्थापित जनजातीय नेता के रूप में वैश्विक मान्यता मिल गयी है। जहां तक आदिवासियों के नेता की बात है, अब हेमंत सोरेन की चर्चा राष्ट्रीय फलक पर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय फलक पर हो रही है। हेमंत सोरेन का राजनीतिक कद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहा है।

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    shivam kumar

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