रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) द्वारा आयोजित द्वितीय राज्य सिविल सेवा परीक्षा (JPSC-2) में हुए भारी अनियमितता के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) दर्ज कर ली है। इस ईसीआईआर में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा नामित कुल 60 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें JPSC के पूर्व शीर्ष अधिकारियों से लेकर बेईमानी से चयनित हुए अधिकारी शामिल हैं।
ईडी के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों की जांच की जाएगी। आरोप है कि अयोग्य उम्मीदवारों को परीक्षा में सफल घोषित करवाने के लिए रिश्वत का लेन-देन हुआ और इस काले धन को वैध बनाने की कोशिश की गई। ईडी की सूची में JPSC से जुड़े छह अधिकारी, गलत तरीके से चयनित हुए 28 उम्मीदवार (जो अब विभिन्न सेवाओं में वरिष्ठ पदों पर हैं), 25 परीक्षक तथा मैसर्स ग्लोबर इनफॉरमेटिक्स के एक प्रबंधक को शामिल किया गया है।
आरोपियों की सूची में JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष दिलीप प्रसाद सहित कई पूर्व सदस्यों के नाम प्रमुखता से शामिल हैं। चिंताजनक पहलू यह है कि गड़बड़ी से चयनित कई उम्मीदवार अब राज्य प्रशासनिक सेवा में एडीएम और राज्य पुलिस सेवा में डीएसपी जैसे संवेदनशील पदों पर पहुंच चुके हैं, तथा कुछ आईपीएस भी बन चुके हैं। यह मामला राज्य की प्रशासनिक मशीनरी की विश्वसनीयता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
12 साल बाद मिली गति
यह मामला लंबे समय से विवादों में घिरा रहा है। प्रारंभ में राज्य सरकार ने एसीबी से जांच का आदेश दिया, लेकिन धीमी गति को देखते हुए झारखंड उच्च न्यायालय ने सीबीआई जांच का आदेश दिया। सीबीआई ने वर्ष 2012 में केस दर्ज किया और कानूनी अड़चनों के चलते करीब 12 साल बाद, 2024 में आरोप पत्र दायर किया। अब ईडी की इस नई कार्रवाई से मामले में एक बार फिर से गति आने की उम्मीद है। ईडी द्वारा आरोपित सभी 60 लोगों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जांच की जाएगी, जिसमें आरोप सिद्ध होने पर संपत्ति जब्ती तक का प्रावधान है।

