कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के नाम पर आम लोगों को परेशान किए जाने का आरोप लगाया है। ममता बनर्जी ने कहा है कि चुनाव आयोग जिस तरह से इस प्रक्रिया को चला रहा है, उससे वह “स्तब्ध और बेहद व्यथित” हैं।
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि एसआईआर पूरी तरह मशीन और प्रक्रिया-निर्भर हो गया है, जिसमें मानवीय संवेदनशीलता का घोर अभाव दिखाई देता है। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर से जुड़े “आतंक” के कारण अब तक 77 लोगों की मौत हो चुकी है और इन मौतों के पीछे इसी प्रक्रिया से उपजा मानसिक दबाव जिम्मेदार है। ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि एसआईआर सुनवाई के दौरान केवल आम लोग ही नहीं, बल्कि नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री प्रोफेसर अमर्त्य सेन, कवि जय गोस्वामी, अभिनेता दीपक अधिकारी (देव) और क्रिकेटर मोहम्मद शमी जैसे प्रतिष्ठित व्यक्तियों को भी कथित तौर पर परेशान किया गया।
ममता बनर्जी ने एसआईआर सुनवाई में तैनात पर्यवेक्षकों और माइक्रो ऑब्जर्वरों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि बिना पर्याप्त प्रशिक्षण के इनकी एकतरफा नियुक्ति की गई है और कई पर्यवेक्षक अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ मामलों में आम लोगों को “देशद्रोही” तक कह दिया गया।
ममता बनर्जी ने आयोग की तथाकथित “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” सूची को भी पूरी तरह अव्यावहारिक और संदिग्ध बताया। साथ ही, एसआईआर से जुड़े पोर्टल पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में इस्तेमाल किया जा रहा पोर्टल अन्य राज्यों से अलग क्यों है।

