रांची। रांची के राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIMS) में पूर्ण स्वच्छता, हाउसकीपिंग, नगर कचरा प्रबंधन और बायोमेडिकल वेस्ट हैंडलिंग के टेंडर को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। लखनऊ की सन फैसिलिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने RIMS प्रबंधन को पत्र लिखकर तकनीकी मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं और इसकी पुनर्समीक्षा की मांग की है।

शिकायत के मुताबिक, टेंडर में भाग लेने वाली 14 एजेंसियों में से केवल तीन को ही तकनीकी रूप से योग्य घोषित किया गया। आरोप है कि चयनित कंपनियां टेंडर की मूल शर्तों को पूरा नहीं करतीं। टेंडर नियमों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में संबंधित विशिष्ट कार्यों का न्यूनतम 10 करोड़ रुपये का औसत वार्षिक टर्नओवर, 500 बेड वाले अस्पताल में तीन साल का अनुभव, लेबर लाइसेंस और केमिकल स्टोरेज लाइसेंस जैसी अनिवार्य शर्तें हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि चयनित एजेंसियों ने इनमें से कई शर्तों को पूरा करने के आवश्यक और विशिष्ट प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किए।

इसके अलावा एक गंभीर आरोप यह भी लगाया गया है कि एक एजेंसी द्वारा प्रस्तुत अनुभव प्रमाणपत्र संदिग्ध है। इस प्रमाणपत्र पर जिस जिलाधिकारी के हस्ताक्षर बताए गए हैं, वह उस अवधि में उस पद पर पदस्थ नहीं थे। साथ ही, उत्तर प्रदेश की MSME पंजीकृत एजेंसियों को ईएमडी में दी गई छूट को भी झारखंड प्रोक्योरमेंट नीति का उल्लंघन बताया गया है।

शिकायतकर्ता ने RIMS प्रबंधन से पूरी टेंडर प्रक्रिया की पुनः जांच, सभी दस्तावेजों की सत्यापन और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसी अनियमितताएं RIMS जैसी प्रतिष्ठित संस्था की छवि को नुकसान पहुंचा रही हैं।

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