सरायकेला। आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र के वार्ड संख्या 14 और 15 के सीमावर्ती इलाके में रहने वाले हजारों लोगों के लिए ‘स्मार्ट सिटी’ का दावा महज एक कागजी जुमला साबित हो रहा है। पिछले एक दशक से यह इलाका विकास की मुख्यधारा से कटा हुआ है। आलम यह है कि दो वार्डों के बीच स्थित होने के कारण यह क्षेत्र ‘नो मैन्स लैंड’ बन गया है, जहाँ न सड़कें हैं और न ही जल निकासी की कोई व्यवस्था।

वार्डों की खींचतान में पिस रही जनता

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि उनका घर दो वार्डों के बॉर्डर पर होना ही उनके लिए अभिशाप बन गया है। जब भी लोग अपनी समस्याओं को लेकर किसी एक वार्ड पार्षद के पास जाते हैं, तो उन्हें दूसरे वार्ड का मामला बताकर पल्ला झाड़ लिया जाता है। जनप्रतिनिधियों की इसी उदासीनता और सीमा विवाद के कारण पिछले 10 वर्षों से यहाँ न तो नई सड़कों का निर्माण हुआ और न ही नालियों की सुध ली गई।

नारकीय स्थिति: कीचड़ और बीमारियां

क्षेत्र की स्थिति ऐसी है कि हल्की बारिश में ही पूरी बस्ती टापू में तब्दील हो जाती है। उचित ड्रेनेज सिस्टम (नाली) न होने के कारण घरों का गंदा पानी सड़कों पर जमा रहता है, जिससे मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा हर वक्त बना रहता है। कच्ची सड़कों पर पसरा कीचड़ पैदल चलने वालों और वाहन चालकों के लिए हादसों का सबब बना हुआ है। बुजुर्गों और बच्चों का घर से निकलना दूभर हो गया है।

चुनाव बहिष्कार की आहट: ‘काम नहीं तो वोट नहीं’

लगातार हो रही उपेक्षा ने अब जनता के धैर्य का बांध तोड़ दिया है। आगामी नगर निगम चुनाव 2026 को देखते हुए वार्ड 14 और 15 के लोगों ने गोलबंद होना शुरू कर दिया है। मोहल्ले की बैठकों में अब एक ही सुर सुनाई दे रहा है— “विकास नहीं, तो वोट नहीं।” निवासियों ने दो टूक चेतावनी दी है कि वे अब झूठे वादों के झांसे में नहीं आएंगे और केवल उसी प्रत्याशी को चुनेंगे जो धरातल पर काम करके दिखाएगा।

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