काठमांडू: नेपाल में चुनाव की आहट के बीच धार्मिक पहचान को लेकर राजनीतिक पारा गरमा गया है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के उपाध्यक्ष डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने अपनी पार्टी की विचारधारा को लेकर मचे घमासान के बीच एक बड़ा यू-टर्न लिया है। वाग्ले, जो कभी हिंदू राष्ट्र समर्थकों को पार्टी छोड़ने की सलाह देते थे, अब अपनी पार्टी को हिंदू, बौद्ध और किरात समाज वाली सनातन सभ्यता का सबसे बड़ा रक्षक बता रहे हैं।
पुराने भाषण ने बढ़ाई मुश्किलें दरअसल, पिछले चुनाव के दौरान डॉ. वाग्ले का एक विवादास्पद वीडियो सोशल मीडिया पर फिर से वायरल हो गया है। उस भाषण में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि “जिन्हें नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाना है, वे इस पार्टी को छोड़कर जा सकते हैं।” इस बयान के दोबारा चर्चा में आने के बाद मतदाताओं के बीच रास्वपा के उम्मीदवारों का विरोध शुरू हो गया, जिससे पार्टी बैकफुट पर आ गई।
फेसबुक पर दी सफाई: ‘हमें सनातन पर गर्व है’ विरोध को शांत करने के लिए शुक्रवार सुबह डॉ. वाग्ले ने फेसबुक पर एक विस्तृत पोस्ट साझा की। उन्होंने विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए लिखा, “हमारी धारणा एकदम स्पष्ट है—हम सनातन सभ्यता के रक्षक और एक उदार, सहिष्णु समाज के कवच हैं।” उन्होंने जनता से पार्टी के आधिकारिक दस्तावेजों को पढ़ने की अपील की और कहा कि रास्वपा नेपाल के इतिहास और उसकी प्राचीन जड़ों का सम्मान करती है।
आधार स्तंभ हैं तीन धर्म वाग्ले ने अपनी नई व्याख्या में कहा कि हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और आदिवासी जनजातियों का किरात धर्म ही नेपाल की पहचान के मुख्य आधार स्तंभ हैं। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी इन तीनों धर्मों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और इनके खिलाफ होने वाले किसी भी षड्यंत्र का डटकर मुकाबला करेगी। राजनीतिक विश्लेषक वाग्ले के इस बयान को चुनाव से पहले बहुसंख्यक हिंदू और सनातन समर्थकों को लुभाने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।



