रांची: राज्य के व्यपारियों ने अपने आंकड़ों में हेरा-फेरी करके पिछले पांच सालों में राज्य सरकार को बहुत बड़ा झटका दिया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यह लगभग 2952 करोड़ रुपये का है। व्यापारियों ने न सिर्फ अपना वास्तविक व्यापार छुपाया, बल्कि कमर्शियल टैक्स डिपार्टमेंट के अधिकारियों की मदद से कम टैक्स दिया है। इसका खुलासा सीएजी रिपोर्ट में किया गया है।
बिना निबंधन किया विदेशी व्यापार : हैरत की बात तो यह है कि दो व्यापारी ऐसे हैं, जिनका निबंधन नहीं होने के बावजूद उन्होंने विदेशी व्यापार तक कर डाला। इससे करीब 226.10 करोड़ रुपये का झटका राज्य सरकार को लगा है। देवघर के जगदंबा आश्रम स्थित ट्रेडर भुनेश्वर नाथ ने वर्ष 2012-14 के बीच 12.14 करोड़ रुपये के फर्नीचर ना केवल आयात किये, बल्कि उसकी बिक्री भी की। वहीं, धनबाद के गुलजार अहमद ने वर्ष 2012-13 में 213.87 करोड़ रुपये के मोबाइल फोन और एस्सेसरीज का आयात किया है। इन दोनों के इस ट्रेड से राज्य सरकार को एक अधेला तक नहीं मिला है, क्योंकि ये दोनों व्यापारी राज्य में रजिस्टर्ड नहीं हैं।
मौजूदा कमर्शियल टैक्स डिपार्टमेंट के नियमों के अनुसार इनसे 24.87 करोड़ रुपये की वसूली की जानी है।
790 व्यापारियों ने 1,226 करोड़ के टैक्स का किया घालमेल
सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक अलग-अलग एजेंसी से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 790 व्यापारियों ने 1,226 करोड़ रुपये के टैक्स की हेरा-फेरी की है। साथ ही 2010-11 से 2014-15 के बीच 64 व्यापारियों ने 25,532 करोड़ रुपये की वस्तुओं की बिक्री और आयात किये, पर दिखाया महज 17,070 करोड़ रुपये का बिजनेस। इससे 1026 करोड़ रुपये के वैट का सरकार को झटका लगा है। वहीं, 2010-11, 2012-13 के दौरान इंडियन मेड फॉरेन लिकर के ट्रेड में शामिल व्यापारियों ने 333 करोड़ रुपये की सामग्री का बिजनेस किया, जबकि दिखाया महज 105 करोड़ का ट्रेड। इससे सरकार को 96 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।