लेवी वसूली में नेताओं और पुलिस अफसरों की भूमिका
रांची। टेरर फंडिंग की आंच अब पुलिस मुख्यालय तक पहुंच गयी है। मामले की जांच कर रही एनआईए को पता चला है कि टीपीसी के नक्सलियों की वरीय आइपीएस अफसरों तक पहुंच थी। नक्सली सीधे आईपीएस अफसरों से बातचीत करते थे। कोल परियोजनाओं में लेवी के रूप में वसूली गयी राशि का हिस्सा कई आइपीएस अफसरों तक पहुंचता था। आइपीएस अफसरों ने उन पैसों से रांची, पश्चिम बंगाल, बेंगलुरू और दिल्ली में फ्लैट और जमीन खरीदी है। अब इन अफसरों से पूछताछ होगी। जिन अफसरों से पूछताछ होनी है, उनमें कई रिटायर हो चुके हैं।
नक्सली और पुलिस अफसरों की बातचीत रिकार्ड: एनआइए को आॅडियो क्लिप मिली है, जिनमें टीपीसी के नक्सली और पुलिस अफसरों के बीच बातचीत रिकार्ड है। एनआइए ने आॅडियो क्लिपिंग्स की जांच पूरी कर ली है। इससे पता चला है कि लेवी वसूली में नेताओं और पुलिस अफसरों की अहम भूमिका थी। वहीं टेरर फंडिंग में पकड़े गये नक्सली, ट्रांसपोर्टर और डीओ होल्डर्स ने भी पूछताछ में बताया था कि लेवी का हिस्सा नियमित रूप से रांची में पुलिस अफसरों और नेताओं तक पहुंचता था।
फ्लैट और जमीन खरीदने के सबूत मिले: मगध आम्रपाली कोल परियोजना, पिपरवार और भुरकुंडा से लेवी से मिले करोड़ों रुपये इन अफसरों ने जमीन और फ्लैट खरीदने में निवेश किया है। एनआइए को 1.20 करोड़, 1.60 करोड़ और 1.50 करोड़ रुपये के तीन फ्लैट और चार बड़े भूखंड खरीदे जाने का साक्ष्य मिले हैं। एनआइए को पता चला है कि टेरर फंडिंग का मास्टर माइंड सुभान मियां अफसरों से मिलता था। लेवी वसूली में परेशानी होने पर पुलिस मुख्यालय में बैठे अफसर स्थानीय पुलिस अफसरों से उसे दूर करवाते थे।
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