आजाद सिपाही संवाददाता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण का जवाब दिया। मोदी के निशाने पर कांग्रेस रही। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिन्होंने देश में इमरजेंसी लगायी, वे लोकतंत्र पर चर्चा कर रहे हैं। इमरजेंसी में लोकतंत्र का गला घोंटा गया। प्रधानमंत्री ने अपने जवाब में कहा कि अगर कांग्रेस न होती, तो देश पर इमरजेंसी का कलंक न लगता। कांग्रेस न होती, तो जातिवाद की खाई न होती। कांग्रेस न होती, तो सिखों का नरसंहार न होता। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सोच पर अर्बन नक्सलियों ने कब्जा कर लिया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि परिवारवाद लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है। कांग्रेस की परेशानी ये है कि उन्होंने डायनेस्टी के आगे कुछ सोचा ही नहीं। जब टैलेंट पर परिवार हावी होता है, तो यह दिखाई देता है। कांग्रेस न होती, तो राजनीति परिवारवाद से मुक्त होती। कांग्रेस न होती, तो भारत विदेशी चश्मे के बजाए स्वदेशी संकल्पों के रास्ते पर चलता। कांग्रेस न होती, तो दशकों तक भ्रष्टाचार को संस्थागत बना कर नहीं रखा जाता।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना के समय देश के 80 करोड़ से ज्यादा देशवासियों को मुफ्त राशन की व्यवस्था की गयी। गरीबों का चूल्हा कभी बंद न हो ऐसा करके भारत ने पूरी दुनिया के सामने उदाहरण पेश किया। यह बड़ी कामयाबी है कि महामारी की रुकावट के बाद भी लाखों परिवारों को गरीबों को पक्का घर देने की दिशा में हम लगातार चलते रहे। जब तक महामारी रहेगी, तब तक सरकार गरीब का जीवन बचाने के लिए जितना खर्च करना पड़ेगा, उतना करेगी। कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि कोरोना पर भारत की कोशिशों की दुनिया भर में तारीफ हो रही है। बेहतर होता कि कांग्रेस के लोग इसका यश लेने की कोशिश करते। उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए कोरोना, किसान, एमएसएमइ जैसे अहम सैक्टर्स के लिए सरकार की योजनाएं गिनायीं।
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