आजाद सिपाही संवाददाता
बेंगलुरु। कर्नाटक में हिजाब विवाद को लेकर हंगामा जारी है। दिन भर कॉलेजों में दोनों ही पक्षों के छात्र इसको लेकर प्रदर्शन करते रहे। इसके बाद राज्य सरकार ने अगले तीन दिन के लिए स्कूल-कॉलेज बंद करने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी। इधर, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने हिजाब विवाद के पीछे गजवा-ए-हिंद का हाथ होने की बात कही है। उन्होंने इसे सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने की साजिश करार दिया है।
इससे पहले कर्नाटक हाइकोर्ट में मंगलवार को हिजाब मामले में मुस्लिम छात्राओं की चार याचिकाओं पर सुनवाई हुई। जस्टिस कृष्णा दीक्षित ने कहा कि हम कारणों और कानून के मुताबिक चलेंगे। किसी के जुनून या भावनाओं से नहीं। जो संविधान कहेगा, हम वही करेंगे। संविधान ही हमारे लिए भगवद्-गीता है। कोर्ट बुधवार को एक बार फिर ढाई बजे मामले पर सुनवाई करेगी।
एक महीने से चल रहा विवाद:
कर्नाटक में हिजाब को लेकर विवाद 1 जनवरी को शुरू हुआ था। यहां उडुपी में छह मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनने के कारण कॉलेज में क्लास रूम में बैठने से रोक दिया गया था। कॉलेज मैनेजमेंट ने नयी यूनिफॉर्म पॉलिसी को इसकी वजह बतायी थी। इसके बाद इन लड़कियों ने कर्नाटक हाइकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। लड़कियों का तर्क है कि हिजाब पहनने की इजाजत न देना संविधान के अनुच्छेद 14 और 25 के तहत उनके मौलिक अधिकार का हनन है।
सोशल मीडिया पर वायरल है वीडियो:
इस बीच सोशल मीडिया पर हिजाब मामले को लेकर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। इसमें कॉलेज में पत्थरबाजी, तिरंगे की जगह भगवा झंडा फहराने, नाराबाजी समेत अन्य वीडियो वायरल हो रहे हैं। घटना शिमोगा की बतायी जा रही है। हालांकि ‘आजाद सिपाही’ इन वीडियो की पुष्टि नहीं करता है, लेकिन मामला तूल पकड़ता जा रहा है। यह मामला धीरे-धीरे कर्नाटक के अन्य हिस्सों में भी पहुंच गया है। मुस्लिम लड़कियों के हिजाब पहनने के जवाब में कुछ हिंदू संगठनों की अपील पर लड़के कॉलेज कैंपस में भगवा शॉल पहन कर पहुंचने लगे हैं।
हाइकोर्ट का फैसला आने तक नियम मानें: बोम्मई
कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने छात्राओं से कहा है कि जब तक हाइकोर्ट इस मामले में फैसला नहीं सुना देता, तब तक वे यूनिफॉर्म को लेकर राज्य सरकार के नियमों का पालन करें। उन्होंने कहा कि स्कूल-कॉलेजों में यूनिफॉर्म को लेकर नियम बनाये गये हैं, ताकि सभी छात्र एक जैसे दिखें। इन नियमों का संविधान में भी जिक्र है और इनका पालन करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि ये नियम कर्नाटक एजुकेशन एक्ट में भी लिखे गये हैं। इस बारे में एक नोटिफिकेशन भी जारी किया गया है।