रायडीह प्रखण्ड के अतिदुर्गम क्षेत्र, घने जंगलों से आच्छादित और पहाड़ों की तलहटी पर बसे दस गांवों में सोलर सिस्टम से बिजली सुविधा बहाल हो जाने के बाद यहां के लोगों की जीवन शैली में व्यापक और सुखद बदलाव आया है।
लालमाटी, तेतरडीपा,लोहराडेरा, करंजकुर, भिंजपूर, जरजट्टा नवाटोली,झलियाबंद, बेहरापाठ, बेन्दवाकोना व सिलिंगा गांव के ग्रामीण बरसों से अपने गांव में बिजली आने का इंतजार कर रहे थे। यह इंतजार भी धीरे-धीरे निराशा में बदल चुकी थी। मगर स्वयंसेवी संस्था प्रदान ने बैंक आफ अमेरिका के वित्तीय व तकनीकी सहायता से ग्रामीणों के ख्वाब को हकीकत में बदल दिया। अब ये गांव सोलर बिजली से रोशन हो चुके हैं। ग्रामीणों के जीवन में भी उजियारा बिखर गया है।
सोलर सिस्टम से बिजली उपलब्ध होने के बाद गांव के किसान अपने खेतो मे सोलर बिजली से खेत का पटवान कर कृषि कार्य कर रहे है। भिंजपूर गांव की एक महिला धान कुट्टी मशीन लगाकर धान कुटने का काम कर आत्मनिर्भर हो रही है। बिजली व्यवस्था उपलब्ध होने से घरेलु उपयोग के अलावे गांव में फोटोकॉपी, कोल्ड ड्रिंक, रेफ्रिजरेटर, टीवी, मोबाईल आदि का उपयोग कर रहे हैं।
इससे निश्चित तौर पर गांव के ग्रामीणों की जीवन शैली में बदलाव आया है। इन गांवों में सोलर सिस्टम का क्षमता 19 किलो वाट से लेकर 7 व 10 किलो वाट तक है। रायडीह प्रखण्ड के इन दस गांव के लगभग 700 परिवार लाभांवित हुए है। सोलर सिस्टम बिजली आपूर्ति के लिए गांव स्तर पर एक संचालन समिति का गठन किया गया है जो सोलर सिस्टम का देखभाल कर रहा है।