रांची। झारखंड प्रदेश में इन दिनों राजभवन और झामुमो के बीच ठनी हुई है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। शुक्रवार को झामुमो के केंद्रीय महासचिव सह प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि मीडिया के माध्यम से पता चला कि राज्यपाल ने प्रिंट मीडिया को बुलाया था और एक मीडिया से उन्होंने स्पष्टीकरण भी मांगा है। अखबारों में पढ़ा कि उन्होंने कई सारी बातें कहीं। उन्होंने कहा कि हिंदी में एक कहावत है दाढ़ी में तिनके वाली। आखिर राज्यपाल को स्पष्टीकरण देने की जरूरत क्यों पड़ी। सुप्रियो ने कहा कि इडी ने जब उनसे कहा कि हिरासत में ले लिये हैं, उसके बाद सभी लोग राजभवन पहुंचे। बसों में बैठे विधायकों को अंदर जाने के बाद बाहर क्यों किया गया। बता दें कि शुक्रवार को सुप्रियो भट्टाचार्य गुरुवार को राज्यपाल के दिये गये बयान पर बोल रहे थे। बयान में झारखंड के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने दिल्ली दौर से गुरुवार को रांची लौटने के बाद पूर्व सीएम हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी और इस्तीफे पर एक न्यूज एजेंसी को जवाब देते हुए कहा था कि हेमंत सोरेन को इडी हिरासत में ले चुकी थी। उसके बाद स्तीफा देने राजभवन आये थे।
भ्रम की स्थिति पैदा करनेवाली बीजेपी
राज्यपाल यह बतायें कि वह कौन दो विधायक थे, जो मीडिया में बयान दे रहे थे कि हैदराबाद नहीं जा रहे हैं। बीजेपी का काम राज्यपाल क्यों कर रहे हैं। भ्रम की स्थिति पैदा करनेवाले बीजेपीवाले हैं। राज्यपाल का काम सरकार को सलाह देना है। उक्त-उक्त की जानकारी लेनी है। पुरानी सरकार के कई विधेयक राजभवन में पड़े हुए हैं। उसे पारित करिये और राज्य के विकास में सहयोग करें।
हम राजभवन की सुरक्षा करनेवाले लोग हैं
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि हम लोग असंवैधानिक काम करनेवाले लोग नहीं हैं और जांच से बचाने के लिए ही एक व्यक्ति को राज्यपाल बनाया गया। सरकार का काम है राजभवन की सुरक्षा करना।
एनडीए सरकार में सीबीआइ पर भरोसा नहीं
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि सीबीआइ की विश्वसनीयता पर सवाल उठने शुरू हो गये हैं। यह बात कोर्ट ने कही है। हम सीबीआइ पर भरोसा नहीं करते हैं, और एनडीए सरकार में बिल्कुल भी करने योग्य नहीं है। सीबीआइ से अच्छी हमारी एसआइटी है। हम उसी से पेपर लीक मामले की जांच करायेंगे।
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि दो बसों को अंदर जाने का परमिशन दिया गया। फिर अंदर जाने के बाद परमिशन नहीं होने की बात कही गयी और उन्हें बाहर निकाल दिया गया। वर्तमान सीएम ने सरकार बनाने का दावा किया और दावे को अस्वीकार करते हुए अपने कक्ष की ओर चले गये। फिर 15 मिनट बाद आकर दावे को उन्होंने स्वीकार किया। राज्यपाल के प्रधान सचिव से दूसरे दिन फोन पर बात की गयी, जिसके बाद सूचित करने की बात कही गयी। फिर दोबारा राजभवन से समय की मांग की गयी और तब जाकर गठबंधन के पांच नेताओं को मिलने की अनुमति दी गयी। मिलने के बाद 10 बजे रात में चंपाई सोरेन को सीएम बनने की बात कही गयी, जब 8:30 बजे रात में इस्तीफा हुआ, तो दूसरे दिन रात का इंतजार क्यों हुआ। एक दिन से अधिक समय तक राज्य का कार्यपालक कौन था।
बहुमत होने के बाद भी फ्लोर टेस्ट की बात क्यों
मंत्रिमंडल विस्तार के समय फ्लोर टेस्ट की बात कही गयी। क्या राज्यपाल को बहुमत की आशंका थी! 49 सदस्य हमारे साथ थे। 81 सदस्यीय विधानसभा में 49 विधायकों के समर्थन के बाद भी राय लेनी पड़ी। बिहार की परिस्थिति अलग है, क्योंकि वह इडी की गिरफ्त में नहीं है। जो आपका संदेश नहीं मानेगा वह इडी की गिरफ्त में रहेंगे। बिहार में सबसे बड़े दल की जगह तीसरे नंबर के दल को बुला लिया गया, लेकिन यहां बहुमत वाले दल को नहीं बुलाया गया।