अनुभव बनाम नई सोच, किस पर लगेगी मुहर?
रांची। रांची नगर निगम का मेयर चुनाव अब पूरी तरह रोचक और हाई-प्रोफाइल होता जा रहा है। भले ही यह चुनाव औपचारिक रूप से गैर-दलीय हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मुकाबला सीधे तौर पर कांग्रेस और भाजपा के बीच सिमट कर रह गया है। दोनों ही पार्टियां अपने-अपने समर्थित उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही हैं।
इस चुनाव की सबसे दिलचस्प बात यह है कि दोनों प्रमुख दावेदारों का सरनेम एक ही है — खलखो। कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार रमा खलखो और भाजपा समर्थित उम्मीदवार रौशनी खलखो के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है, जिससे चुनावी जंग और भी रोमांचक हो गई है।
रमा खलखो पर कांग्रेस का दांव
कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार रमा खलखो ने हाल ही में मेयर पद के लिए नामांकन दाखिल किया। वे इससे पहले वर्ष 2013 में रांची की मेयर रह चुकी हैं और वर्तमान में कांग्रेस की राज्य महिला इकाई की अध्यक्ष हैं। नगर निगम संचालन का लंबा अनुभव कांग्रेस के लिए उनका सबसे बड़ा हथियार माना जा रहा है।
नामांकन के दौरान कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक ताकत का खुला प्रदर्शन किया। मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, कांके विधायक सुरेश बैठा, पूर्व मंत्री बंधु तिर्की, अजय नाथ शाहदेव, रांची महानगर अध्यक्ष कुमार राजा, मीडिया प्रभारी सतीश पॉल मुजनी, युवा नेता मोहम्मद जावेद समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। कांग्रेस इसे संकेत मान रही है कि पार्टी संगठन पूरी मजबूती के साथ रमा खलखो के पीछे खड़ा है।
हालांकि, रमा खलखो के सामने एक चुनौती भी है। 2013 के चुनाव से जुड़ा कैश स्कैंडल विवाद एक बार फिर विपक्ष द्वारा उठाया जा सकता है, जिसका असर उनकी छवि पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
भाजपा की उम्मीद रौशनी खलखो
दूसरी ओर, भाजपा समर्थित उम्मीदवार रौशनी खलखो भी मजबूत दावेदार के रूप में उभर कर सामने आई हैं। वे वार्ड संख्या 21 से पार्षद रह चुकी हैं और नगर निकाय चुनाव समय पर नहीं कराए जाने के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुकी हैं।
उनकी याचिका के बाद ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जल्द चुनाव कराने का निर्देश दिया था। भाजपा रौशनी खलखो को एक साफ-सुथरी छवि, कानून के प्रति सजग और विकासोन्मुख उम्मीदवार के तौर पर पेश कर रही है। संगठन स्तर पर भाजपा बूथ मैनेजमेंट और कैडर एक्टिवेशन पर खास फोकस कर रही है।
साख की लड़ाई बना मेयर चुनाव
23 फरवरी 2026 को होने वाला यह चुनाव कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए साख की लड़ाई बन चुका है। कांग्रेस जहां सत्तारूढ़ जेएमएम-कांग्रेस-राजद गठबंधन का हिस्सा है, वहीं भाजपा पिछली नगर निगम चुनावों में मिली सफलता को भुनाने की कोशिश में जुटी है।
2018 के नगर निगम चुनाव में भाजपा ने 34 में से 21 वार्डों में जीत दर्ज की थी और मेयर पद पर भी बड़ी जीत हासिल की थी। यही आंकड़े भाजपा को मनोवैज्ञानिक बढ़त दिला रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो फिलहाल भाजपा समर्थित रौशनी खलखो का पलड़ा थोड़ा भारी नजर आ रहा है। हालांकि, यदि सत्तारूढ़ गठबंधन पूरी तरह एकजुट होकर रमा खलखो के समर्थन में उतरता है, तो मुकाबला पलट भी सकता है। अंतिम फैसला मतदाता टर्नआउट और स्थानीय मुद्दों पर निर्भर करेगा।

