आजाद सिपाही संवाददाता
रांची। झारखंड पुलिस विश्वव्यापी महामारी कोरोना राज्य में नहीं फैले, इसके लिए दिन रात मेहनत कर रही है। करीब एक लाख पुलिसकर्मी पूरे राज्य में सड़क पर हैं। लॉकडाउन में कोई भी व्यक्ति घर से बाहर नहीं निकले, इसका प्रयास हो रहा है। पुलिस भूखे-प्यासे सड़क पर है। चिलचिलाती धूप में चौक-चौराहों पर न तो इनके लिए पीने का पानी और न ही खाने की व्यवस्था है। ऐसा नहीं है कि कोरोना इनको नहीं पकड़ेगा। परिवार इनका भी है। लेकिन चिंता राज्य के लोगों की है। डीजीपी एमवी राव की अगुवाई में सीनियर पुलिस अधिकारियों की बैठक भी हो रही है। पिछले तीन दिनों से कई पुलिसकर्मी अपने घर तक नहीं गये हैं। यह स्थिति फिलहाल 14 अप्रैल तक रहेगी। जरूरत पड़ने पर इसे बढ़ाया भी जा सकता है। पुलिसकर्मी सिर्फ शहर ही नहीं, गांव में भी लॉकडाउन को सफल बनाने में जुटे हैं। उन्हें पता है कि अगर पुलिस थोड़ी सी ढील देगी, तो लोग सड़क पर आ जायेंगे।
लाठी ही माध्यम नहीं
लॉकडाउन में कुछ लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं। चौक-चौराहों पर तैनात पुलिसकर्मी उन्हें रोकते हैं। कहां जा रहे हैं और किस कारण से जा रहे हैं, यह भी पूछते हैं। संतोषप्रद जवाब मिलने के बाद उन्हें जाने दिया जाता है। कुछ लोग बेवजह शहर में घूमते हैं, तो यही पुलिसवाले समझाने की बजाय उन पर लाठियां भी चटकाते हैं। कई युवकों की मोटरसाइकिल की हवा भी खोली गयी। कहीं-कहीं उठक बैठक कराया जाता है, तो कहीं युवकों पोस्टर थमा कर फोटो खींची जाती है। लोगों का कहना है कि पुलिसकर्मियों को लॉकडाउन को सफल बनाने में लाठी का कम सहारा लेना चाहिए।
पुलिस का यह भी चेहरा
रांची में पुलिस का मानवीय चेहरा भी सामने आया है। पुलिस ने कई बेसहारा व्यक्तियों की मदद की और भूखों को खाना खिलाया। खुद को भोजन मिले या न मिले, पर गरीबों को भोजन कराने में रांची पुलिस के जवान जुटे रहे। हिनू चौक महावीर मंदिर के पास एक वृद्धा सड़क के किनारे बैठी थी। एक अधिकारी ने उसे खाने का पैकेट दिया। दूसरे चौक चौराहों पर भी यही स्थिति थी।
डीजीपी की अपील-समझाएं
डीजीपी एमवी राव ने पुलिसकर्मियों से अपील की है कि आम लोगों के साथ मित्रवत व्यवहार करें। जो लोग सड़क पर निकलते हैं, उन्हें यह समझाने की कोशिश करें कि घर में रहने से उनकी जिंदगी सुरक्षित है। दुर्व्यवहार से पुलिस की छवि खराब होगी। उन्होंने इस संबंध में सभी जिला के एसपी को भी निर्देश दिया है।
उधर रांची में लॉक डॉन को और कारगर बनाने के लिए 3000 अतिरिक्त जवान उपलब्ध कराये गये हैं। यह जवान अब शहर के गली मोहल्ले में भी गस्त करेंगे कई स्थानों पर अस्थाई पिकेट भी बनाया जायेगा।

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