रांची। बाबूलाल मरांडी का मुद्दा अब गरमाने लगा है। झारखंड विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद इंदर सिंह नामधारी ने कहा है कि झाविमो के भाजपा में विलय के मामले में यदि न्यायसंगत फैसला किया गया, तो बाबूलाल मरांडी के साथ प्रदीप यादव और बंधु तिर्की की भी सदस्यता रद्द होगी। उन्होंने 10वीं अनुसूची की व्याख्या करते हुए कहा कि इस कानून के तहत किसी दूसरे दल में विलय के लिए दो तिहाई विधायकों के साथ पार्टी कार्यसमिति के दो तिहाई सदस्यों का भी समर्थन होना जरूरी है। बाबूलाल मरांडी के साथ पार्टी कार्यसमिति तो है, लेकिन दो तिहाई विधायक नहीं हैं। इसलिए उनकी सदस्यता रद्द होनी चाहिए। इसी तरह प्रदीप यादव और बंधु तिर्की के साथ पार्टी कार्यसमिति नहीं है। इसलिए इन दोनों को भी अयोग्य करार दिया जाना चाहिए। नामधारी ने कहा कि फैसले में देरी से स्पीकर जैसे संवैधानिक पद पर सवाल खड़े होने लगते हैं।
एनोस एक्का मामले को याद करते हुए नामधारी ने कहा कि उस वक्त एनइ होरो ने एनोस एक्का के खिलाफ आवेदन दिया था। जब एनइ होरो से एनोस एक्का को पार्टी द्वारा जारी निर्देश की प्रति उपलब्ध कराने को कहा गया, तो वह ऐसा नहीं कर सके।
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