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    Home»विशेष»धैर्य और साहस की जीवंत प्रतीक सुनीता विलियम्स
    विशेष

    धैर्य और साहस की जीवंत प्रतीक सुनीता विलियम्स

    shivam kumarBy shivam kumarMarch 20, 2025No Comments7 Mins Read
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    विशेष
    नमस्कार। आजाद सिपाही विशेष में आपका स्वागत है। मैं हूं राकेश सिंह।
    भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके साथी बुच विल्मोर नासा के निक हैग और रूसी अंतरिक्ष यात्री अलेक्जेंडर गोर्बुनोव नौ महीने से अधिक के लंबे मिशन के बाद सफलतापूर्वक पृथ्वी पर लौट आये हैं। स्पेसएक्स के ड्रैगन अंतरिक्ष यान के जरिये उन्हें सुरक्षित रूप से फ्लोरिडा के तट के करीब समंदर में उतारा गया। इस ऐतिहासिक वापसी के दौरान एक दिलचस्प नजारा भी देखने को मिला, जब कैप्सूल के समुद्र में उतरते ही डॉल्फिन उसके आसपास तैरती नजर आयीं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का यह मिशन इसलिए भी ऐतिहासिक है, क्योंकि इसकी मदद से सुनीता विलियम्स ने खुद को इंसानी धैर्य और साहस की जीवंत प्रतीक बना लिया है। इसलिए उनकी वापसी पर जहां पूरी दुनिया खुश है, वहीं भारत में यह खुशी दोगुनी है, क्योंकि उनकी रगों में भारत का खून है। सुनीता विलियम्स को दुनिया भर से बधाई और शुभकामना संदेश मिले हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश बेहद खास है, क्योंकि इसमें लिखा गया है, हमें तुम पर गर्व है भारत की बेटी। सुनीता विलियम्स ने अनंत अंतरिक्ष में नौ महीने गुजार कर एक तरफ जहां महिलाओं की हिम्मत का नया प्रतिमान गढ़ा है, वहीं उन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान को भी नयी ऊंचाइयां दी हैं। खुद नासा ने उनके द्वारा किये गये डेढ़ सौ से अधिक प्रयोगों की मदद से अपने भावी अंतरिक्ष अभियानों को और अधिक निरापद बनाने की बात कही है और मानवता के हित के लिए उनके इस्तेमाल की घोषणा की है। बहरहाल, सुनीता विलियम्स की धरती पर वापसी के लिए उन्हें ढेर सारी बधाइयां और उनके जज्बे को सलाम। क्या है सुनीता विलियम्स की बापसी के मायने, बता रहे हैं आजाद सिपाही के विशेष संवाददाता राकेश सिंह।

    भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके साथी नौ महीने बाद इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से धरती पर मंगलवार देर रात 3:27 बजे लौट आयीं। गुजरात के मेहसाणा में पैदा हुए डॉ दीपक पांड्या की बेटी सुनीता ने इतने दिनों तक अंतरिक्ष में रह कर वह प्रतिमान कायम किया है, जिसके लिए बहुतों को उनसे ईर्ष्या हो रही होगी। इंसानी धैर्य और साहस की प्रतिमूर्ति बन कर धरती पर लौटीं सुनीता विलियम्स ने साबित कर दिया है कि इंसान के लिए कुछ भी असंभव नहीं है। यदि इंसान चाह ले, तो फिर वह अनंत अंतरिक्ष को भी मात दे सकता है। सुनीता की वापसी पर अमेरिका के साथ भारत में भी खुशी मनायी जा रही है। उनके वापस आने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके साहस की सराहना की है और भारत आने का न्योता भी दिया है।

    पीएम मोदी ने सुनीता विलियम्स की वापसी पर लिखा
    पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, आपका पुन: स्वागत है, क्रू 9! पृथ्वी को तुम्हारी याद आयी। यह उनके धैर्य, साहस और असीम मानवीय भावना की परीक्षा रही है। सुनीता विलियम्स और क्रू 9 अंतरिक्ष यात्रियों ने एक बार फिर हमें दिखाया है कि दृढ़ता का वास्तविक अर्थ क्या है। विशाल अज्ञात के सामने उनका अडिग दृढ़ संकल्प लाखों लोगों को सदैव प्रेरित करेगा।

    सुनीता विलियम्स कै पैतृक गांव में मना जश्न
    सुनीता विलियम्स के धरती पर लौटने पर बुधवार सुबह गुजरात के मेहसाणा जिले में उनके पैतृक गांव में जश्न का माहौल रहा। झूलासन के सभी लोग टेलीविजन पर इस घटना का सीधा प्रसारण देखने के लिए गांव के मंदिर में एकत्र हुए। सभी की निगाहें सुनीता की सुरक्षित वापसी पर टिकी थीं। सुनीता विलियम्स और अन्य अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर कैप्सूल रूपी यान जैसे ही उतरा, ग्रामीणों ने आतिशबाजी शुरू कर दी और हर हर महादेव के जयकारे लगाते हुए हर कोई झूमने लगा।

    क्यों ऐतिहासिक है सुनीता विलियम्स की वापसी
    साल 1967 में फिल्म आयी थी तकदीर। फिल्म में एक बड़ा ही मार्मिक और हृदयस्पर्शी गीत है,
    सात समंदर पार से, गुड़ियों के बाजार से,
    अच्छी सी गुड़िया लाना, गुड़िया चाहे न लाना
    पापा जल्दी आ जाना।
    इस गीत को लता मंगेशकर ने अपने सुरों से सजाया था। गाने में सिचुएशन यह है कि एक छोटी बच्ची अपनी मां और भाई-बहनों के साथ मिलकर पापा के जल्दी आ जाने की प्रार्थना कर रही है। पहले वह कहती है कि मेरे लिए कोई गुड़िया ले आना, लेकिन अगले ही पल वह कहती है, गुड़िया चाहे न भी लाना, लेकिन पापा तुम जल्दी आ जाना। किसी का बहुत दूर चले जाना और फिर जल्दी न लौट पाना और यह नहीं जानना कि उसका लौट पाना कब संभव होगा, यह किसी के भी जीवन की सबसे त्रासद घटना है। बड़ी बात यह है कि ये त्रासदी दोनों ही ओर घटती है। एक तो उसमें जो ये सोचकर दिन बिता रहा है कि वह घर कब लौटेगा और दूसरी उनमें, जो इस इंतजार में हैं कि जो गये हैं, वो लौटेंगे कब। यह त्रासदी वहां अपने चरम पर होती है, जब सवाल कब लौटना होगा का नहीं, कैसे लौटना होगा का बन जाये। मन आशंका से घिर जाये कि लौटना होगा भी कि नहीं, भयभीत मन पल-पल ये सोचने लग जाये कि लगता है कि अब नहीं लौट पायेगा। सुनीता विलियम्स बीते नौ महीने इन्हीं सवालों के आवरण में रही हैं। इसलिए उनकी वापसी ऐतिहासिक भी है और खुशियां मनाने का अवसर भी।

    उनका घर लौटना नये जन्म की तरह
    यूं तो सुनीता का घर टेक्सास के ह्यूस्टन में है, लेकिन नौ माह यानी 286 दिन अंतरिक्ष में बिताने के बाद सुनीता अक्सर सोचती होंगी कि घर कहां पर है? क्या इस निस्सार संसार में मनुष्य की अजनबी आत्मा का कोई घर है भी? ध्यान देने वाली बात है कि नौ माह यानी यही 280 दिन का दौर एक शिशु का गर्भ में पूर्ण विकसित होकर बाहरी दुनिया में जन्म लेने की तयशुदा अवधि है। और यह भी देखिए कि जब धरती पर इस देह की इहलीला समाप्त हो जाती है, तो हम उसके जाने की दिशा अंतरिक्ष ही बताते हैं। वही अनंत आकाश, जहां सब शून्य है। सवाल करते हैं कि आत्मा कहां गयी, उत्तर मिलता है कि वह तो स्वर्गवासी हो गयी। तो इसलिए सुनीता का घर लौटना नये जन्म की तरह है। वह फिर से चलेंगी, बोलेंगी और महसूस करेंगी, जैसे एक शिशु करता है। जब ड्रैगन कैप्सूल पृथ्वी के वायुमंडल में दाखिल हुआ, तो इसका तापमान 1,600 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। स्प्लैशडाउन के बाद सेफ्टी टीम ने रिकवरी शिप की मदद से चारों अंतरिक्षयात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। सबसे पहले निक हेग, फिर एलेक्जेंडर गोर्बुनोव, उसके बाद सुनीता विलियम्स और आखिर में बुच विल्मर को बाहर लाया गया। नौ महीने के अंतराल के बाद जब सुनीता ने पहली बार पृथ्वी की ग्रैविटी महसूस की, पहली सांस लेते ही उनके कदम तो डगमगाये, लेकिन उनके चेहरे पर खुशी झलक रही थी। उन्होंने हाथ हिलाकर सभी को अभिवादन किया।

    सुकून देने वाली है सुनीता विलियम्स की घर वापसी
    वास्तव में सुनीता विलियम्स की यह वापसी एक सुकून देती है और उम्मीद जगाती है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी घर लौट आने की एक गुंजाइश तो होती है। उनका घर लौट आना एक वैज्ञानिक घटना से कहीं अधिक बड़ा है। यह एक काव्य है, जो अंतरिक्ष के शून्य और धरती की माटी को जोड़ता है। यह एक नाद है, जो गीता के कर्मयोग और हिंदू दर्शन के पुनर्जन्म को प्रतिबिंबित करता है। जैसे कोई परिंदा थक कर अपने घोंसले में लौटता है, वैसे ही सुनीता धरती की गोद में विश्राम पा रही हैं। उनका शरीर अब नवजात की तरह कोमल है। हृदय संकुचित है और मस्तिष्क की नसें भी नवजात की ही तरह कुछ सिकुड़ी सी होंगी, लेकिन उनकी आंखों में चमक, उनके कदमों में थकान, और उनके हृदय में अपनों से मिलन की उत्कंठा होगी और यह सब एक ऐसी तस्वीर बनाता है, जिनसे आंखें नमी पाती हैं और आत्मा अपनी ऊंचाई।

    अंतरिक्ष में सबसे अधिक समय बिताने वाली महिला का रिकॉर्ड
    नासा के अनुसार, सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष में सबसे अधिक समय बिताने वाली महिला का नया रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने स्पेस स्टेशन के बाहर 62 घंटे और 9 मिनट तक काम किया और 9 बार स्पेसवॉक किया। उनके इस ऐतिहासिक मिशन ने अंतरिक्ष अनुसंधान में एक और मील का पत्थर जोड़ा है। इस सफल मिशन के बाद नासा और स्पेसएक्स दोनों ने सुनीता विलियम्स और उनके साथी अंतरिक्षयात्रियों की हिम्मत और समर्पण की सराहना की। उनकी सुरक्षित वापसी ने भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए नयी संभावनाओं के दरवाजे खोल दिये हैं।

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