वाशिंगटन। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान के साथ चल रहे खतरे के बीच अमेरिका ने एक ऐसी मिसाइल का परीक्षण किया है जिसे ‘डूम्सडे मिसाइल’ कहा जाता है। यह मिनटमैन-III अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) अमेरिकी सेना के परमाणु हथियारों का सबसे घातक हिस्सा मानी जाती है। कैलिफोर्निया स्थित वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से रात 11 बजे लॉन्च की गई इस मिसाइल ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है।
अमेरिकी वायु सेना के ग्लोबल स्ट्राइक कमांड के मुताबिक, यह परीक्षण GT-255 नामक मिशन के तहत किया गया। इस मिसाइल में दो टेस्ट री-एंट्री व्हीकल लगे थे जो पृथ्वी के वायुमंडल में वापस आकर अपने लक्ष्य पर सटीकता से वार कर सकते हैं। मार्शल द्वीप के पास पश्चिम-मध्य प्रशांत महासागर में गिरी यह मिसाइल अपने लक्ष्य को पूरी तरह नष्ट करने में सक्षम है।
मिनटमैन-III की विनाशक क्षमता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यह 1945 में हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से 20 गुना ज्यादा शक्तिशाली हो सकती है। यह एक साथ तीन स्वतंत्र परमाणु युद्धक ले जाने में सक्षम है जो अलग-अलग दिशाओं में जाकर तबाही मचा सकते हैं। साइलो-आधारित यह मिसाइल अमेरिका की एकमात्र स्थिर भूमि आधारित परमाणु प्रणाली है।
हालांकि, अमेरिकी सेना ने इसे ‘नियमित परीक्षण’ करार दिया है। ग्लोबल स्ट्राइक कमांड के अधिकारियों का कहना है कि यह परीक्षण वर्षों पहले से निर्धारित था और वर्तमान वैश्विक घटनाक्रम से इसका कोई संबंध नहीं है। उनके मुताबिक, पिछले कई दशकों से 300 से अधिक ऐसे परीक्षण किए जा चुके हैं जो हथियार प्रणाली की प्रभावशीलता जांचने के लिए जरूरी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परीक्षण ईरान को एक स्पष्ट संदेश है। मध्य पूर्व में अमेरिकी हितों पर हो रहे हमलों और तेल टैंकरों पर बढ़ते खतरे के बीच यह परीक्षण अमेरिकी सैन्य ताकत का प्रदर्शन है। मिसाइल की रेंच 13,000 किलोमीटर से अधिक है जो दुनिया के किसी भी कोने तक मार कर सकती है।
परमाणु निरोधक विशेषज्ञों के अनुसार, मिनटमैन-III का नाम ‘डूम्सडे’ इसलिए पड़ा क्योंकि इसके प्रयोग के बाद विकिरण का प्रभाव इतना व्यापक होगा कि पृथ्वी का बड़ा हिस्सा रहने योग्य नहीं रहेगा। अमेरिका अब इसकी जगह नई पीढ़ी की Sentinel मिसाइल विकसित कर रहा है, लेकिन मिनटमैन-III 2030 तक सक्रिय रहेगी।
वैश्विक स्तर पर इस परीक्षण को लेकर चिंता जताई जा रही है। रूस और चीन ने पहले ही अमेरिकी परमाणु प्रसार पर सवाल उठाए हैं। संयुक्त राष्ट्र ने भी सभी परमाणु शक्तियों से हथियार नियंत्रण संधियों का पालन करने की अपील की है।
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