नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब शेयर बाजारों पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के और तेज होने की आशंका तथा हूती विद्रोहियों के संभावित शामिल होने से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। इसका सीधा असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर पड़ा है, जहां बिकवाली का दबाव देखने को मिल रहा है।

अमेरिकी शेयर बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान कमजोरी का माहौल बना रहा। वॉल स्ट्रीट के प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। एस एंड पी 500 इंडेक्स 1.67 प्रतिशत गिरकर 6,368.85 अंक पर बंद हुआ, जबकि नैस्डेक में 2.15 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह 20,948.36 अंक पर बंद हुआ। वहीं, डाउ जॉन्स फ्यूचर्स में भी मामूली कमजोरी देखी जा रही है, जो संकेत देता है कि बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

यूरोपीय बाजारों की बात करें तो वहां भी दबाव बना रहा। एफटीएसई इंडेक्स हल्की गिरावट के साथ 9,967.35 अंक पर बंद हुआ। सीएसी इंडेक्स 0.87 प्रतिशत गिरकर 7,701.95 अंक पर पहुंच गया, जबकि जर्मनी का डीएएक्स इंडेक्स 1.40 प्रतिशत टूटकर 22,300.75 अंक पर बंद हुआ।

एशियाई बाजारों में भी आज अधिकांश सूचकांक लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं। नौ प्रमुख बाजारों में से आठ में गिरावट देखी जा रही है। जापान का निक्केई इंडेक्स सबसे ज्यादा 3.36 प्रतिशत गिरा है। इसके अलावा हैंग सेंग, कोस्पी, ताइवान वेटेड और जकार्ता कंपोजिट इंडेक्स में भी कमजोरी दर्ज की गई है। हालांकि, शंघाई कंपोजिट इंडेक्स में हल्की बढ़त देखने को मिली, जो क्षेत्रीय बाजारों में एकमात्र सकारात्मक संकेत है।

भारतीय बाजार के लिए भी संकेत कमजोर नजर आ रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी 1.25 प्रतिशत गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है, जिससे घरेलू बाजार में भी दबाव की आशंका जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक तनाव कम नहीं होता, तब तक बाजारों में अस्थिरता बनी रह सकती है और निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

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