कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय नई चर्चा शुरू हो गई जब राज्य के पूर्व राज्यपाल C. V. Ananda Bose ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। रविवार को कोलकाता एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि यह फैसला उन्होंने पूरी तरह सोच-समझकर लिया है। हालांकि, इस्तीफे के पीछे के वास्तविक कारणों का खुलासा उन्होंने फिलहाल नहीं किया और कहा कि उचित समय आने पर ही इस बारे में जानकारी दी जाएगी।

पूर्व राज्यपाल ने कहा कि जीवन और जिम्मेदारियों में भी एक खेल की तरह नियम होते हैं। उन्होंने कहा, “खेल में एक नियम यह भी होता है कि कब खेल को खत्म करना है। जब मेरी एंट्री हुई थी, उसी समय मुझे पता था कि एक दिन एग्जिट भी होगा। मुझे खुद फैसला लेने का मौका मिला और मैंने इस्तीफा देने का निर्णय लिया।”

बोस ने अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने राज्यपाल के तौर पर लगभग 1200 दिन पूरे किए हैं। उन्होंने इसे क्रिकेट की भाषा में समझाते हुए कहा कि यह 12 सेंचुरी के बराबर है और अब उन्हें लगा कि रुकने का यही सही समय है। उन्होंने कहा कि हर भूमिका का एक उचित समय होता है और उन्होंने उसी के अनुसार यह कदम उठाया है।

कोलकाता एयरपोर्ट पर बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी बताया कि वे भविष्य में अपना वोट डालने के लिए पश्चिम बंगाल आएंगे। दिलचस्प बात यह है कि केरल के मूल निवासी बोस हाल ही में पश्चिम बंगाल के मतदाता बने थे। उन्होंने राज्यपाल पद से इस्तीफा देने से लगभग एक सप्ताह पहले ही बंगाल में अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज कराया था।

जब उनसे राष्ट्रपति Droupadi Murmu द्वारा पश्चिम बंगाल में कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन और आदिवासी उत्पीड़न को लेकर जताई गई चिंता पर सवाल किया गया, तो उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति एक अनुभवी और गरिमामय व्यक्तित्व हैं और उनके बयान के पीछे निश्चित ही कुछ ठोस कारण होंगे। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति के बयान पर टिप्पणी करना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

अगर बात करें सीवी आनंद बोस के व्यक्तिगत जीवन और करियर की, तो वे केरल के कोट्टायम के रहने वाले हैं और भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के पूर्व अधिकारी रह चुके हैं। प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्होंने कई अहम पदों पर काम किया, जिनमें भारत सरकार के सचिव और मुख्य सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। वे आवास विशेषज्ञ, लेखक और वक्ता के रूप में भी जाने जाते हैं। इसके अलावा वे संयुक्त राष्ट्र की संस्था UN‑Habitat से भी जुड़े रहे हैं।

उन्हें 23 नवंबर 2022 को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। उनके पिता पी.के. वासुदेवन नायर स्वतंत्रता सेनानी थे और Subhas Chandra Bose के अनुयायी थे, इसी वजह से उनके नाम में ‘बोस’ जोड़ा गया।

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