तेहरान। पश्चिम एशिया में युद्ध के बादल गहराते जा रहे हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका की ‘बिना शर्त आत्मसमर्पण’ की मांग को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसी उम्मीद रखना सिर्फ एक सपना है जो कभी पूरा नहीं होगा। राज्य टीवी पर प्रसारित संदेश में उन्होंने साफ कहा कि ईरान किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।
पड़ोसियों पर हमलों पर जताया खेद
हालांकि पेजेशकियन ने क्षेत्रीय देशों पर हुए हमलों को लेकर अप्रत्याशित रूप से खेद भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हाल में खाड़ी के कुछ देशों पर हुए हमले गलतफहमी के कारण हुए। तेहरान आगे ऐसी घटनाओं को रोकने की कोशिश करेगा, बशर्ते उन देशों की जमीन से ईरान पर कोई हमला न किया जाए। ईरानी मीडिया के मुताबिक अंतरिम नेतृत्व परिषद ने इस फैसले को कल ही मंजूरी दी है। यह बयान ऐसे समय आया है जब शनिवार सुबह बहरीन, सऊदी अरब और यूएई पर हमलों की खबरों से पूरा क्षेत्र दहल उठा।
पुतिन ने की शांति की अपील
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पेजेशकियन से फोन पर बातचीत की। पुतिन ने क्षेत्र में जारी संघर्ष को तुरंत रोकने और शांति की दिशा में कदम उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि ईरान से जुड़े विवादों का समाधान बल प्रयोग से नहीं, बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक रास्तों से होना चाहिए। पुतिन ने सभी पक्षों से संयम बरतने और संवाद के जरिए समाधान तलाशने की मांग की।
अमेरिका की बड़ी चेतावनी
वहीं अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि शनिवार रात ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया जाएगा। इस हमले का मकसद ईरान के मिसाइल लॉन्चर और मिसाइल बनाने वाली फैक्ट्रियों को भारी नुकसान पहुंचाना है। यह चेतावनी ईरान के लिए गंभीर संकेत है।
अरब लीग की आपात बैठक
ईरानी हमलों के मुद्दे पर अरब लीग के विदेश मंत्री रविवार को आपात बैठक करने जा रहे हैं। अरब लीग के सहायक महासचिव हुसाम जाकी ने बताया कि यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से होगी। इस बैठक की मांग सऊदी अरब, कुवैत, कतर, ओमान, जॉर्डन और मिस्र ने संयुक्त रूप से की है। इन देशों का कहना है कि क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव को देखते हुए तत्काल सामूहिक रुख तय करना जरूरी है।
पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात
पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। 28 फरवरी से शुरू हुई जंग में ईरान इस्राइल समेत 13 देशों को निशाना बना चुका है। अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ टकराव बढ़ता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह संघर्ष और भयानक रूप लेगा या फिर कूटनीतिक रास्ते निकल पाएंगे। ईरान के राष्ट्रपति का बयान संभावित समझौते की एक खिड़की तो दिखाता है, लेकिन अमेरिका की चेतावनी युद्ध के खतरे को भी बरकरार रखती है।
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