चीन को अपने अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट को पूरा करने से पहले अन्य देशों के विवादों पर भी ध्यान देना चाहिए। कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष विद्वान ने कहा है कि कम्युनिस्ट देश को चीन-पाकिस्तान इकोनोमिक कोरिडोर (सीपीईसी) को पूरा करने में भारत की चिंताओं का भी ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने साथ ही कहा कि जब तक इन विवादों का समाधान नहीं हो जाए तब तक इन प्रोजेक्टों को अस्थाई रूप से रोका जा सकता है।

कास्गर-ग्वादर सीपीईसी प्रोजेक्ट चीन के राष्ट्रपति शी जिंगपिग का बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के अंतर्गत प्रमुख प्रोजेक्ट है। भारत लगातार इस प्रोजेक्ट को लेकर अपनी चिंताएं पड़ोसी देश के समक्ष उठाता रहता है जो कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) से होकर गुजरेगा।

चीन के थिंक टैंक एकेडमी ऑफ सोशल साइंसेज (सीएएसएस) की अध्यक्ष मंडली के सदस्य झांग युनलिंग ने कहा कि अतंरराष्ट्रीय परियोजनाओं में दूसरे देशों के हित भी शामिल होते हैं। हमें समन्वय स्थापित करने की जरूरत है जिससे सभी पक्ष इसको मान सकें। अगर हम कोई संतुलन नहीं बना सकें तो इसको रोका जा सकता है।

यह पूछे जाने पर कि सीपीईसी पाक अधिकृत कश्मीर से गुजर रहा है तो झांग ने कहा कि उदाहरण के लिए मेकांग नदी पर नेविगेशन रूट के मामले में काफी समस्या आई थीं। हमने एक के बाद एक समस्या पर चर्चा की थी। हमें सीखने की जरूरत है। कभी-कभी सबक काफी बड़ा होता है। हम प्रोजेक्ट को रोक सकते हैं।

उन्होंने कहा कि यह हमेशा आसान नहीं होता है। किसी भी अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट में कई देशों की चिंताएं होती हैं। हमें संतुलना बना चाहिए जो कि सभी पक्षों को मान्य हो। उन्होंने आगे कहा कि अगर किसी संतुलन तक नहीं पहुंच सकें तो प्रोजेक्ट को कुछ समय के लिए बंद कर देना चाहिए। किसी भी अंतरराष्ट्रीय परियोजना में इस तरह की जटिलताएं पेश आती ही हैं।

 

मई में होने वाले बेल्ट एंड रोड फोरम (बीआरएफ) के लिए झांग प्रेस को संबोधित कर रहे थे। इस फोरम में 30 राष्ट्रों के राष्ट्राध्यक्ष शिरकत करेंगे।

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