रांची: झारखंड हाइकोर्ट ने मेयर आशा लकड़ा को तलब किया है। नगर आयुक्त एवं मेयर के बीच आपसी विवाद कोर्ट के संज्ञान में आने पर हाइकोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया। कोर्ट ने मेयर को प्रतिवादी बनाने का निर्देश प्रार्थी को दिया। साथ ही मेयर को नोटिस जारी कर 18 अप्रैल को सशरीर उपस्थित होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने नगर आयुक्त से रिपोर्ट मांगी है कि रांची में कितने करोड़ की विकास योजना बाधित हुई है। कोर्ट ने मौखिक कहा कि रांची नगर निगम ने होल्डिंग टैक्स में करीब साढेÞ चार गुना वृद्धि की है, लेकिन शहर के आम लोगों को मच्छरों से निजात दिलाने या अन्य मूलभूत सुविधाएं दिलवाने के लिए कुछ नहीं किया है। जब नगर आयुक्त और मेयर में आपसी विवाद हो, तो ऐसे में शहर का क्या विकास होगा, यह समझा जा सकता है। हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पीके मोहंती एवं न्यायमूर्ति आनंद सेन की खंडपीठ ने रांची में मच्छरों के प्रकोप को लेकर दीवान इंद्रनील सिन्हा की जनहित याचिका पर सुनवाई सोमवार को की।
मच्छरों को भगाने वाला छिड़काव हो रहा है नाकाम
खंडपीठ ने मौखिक कहा कि रांची शहर के विभिन्न वार्डो में जो मच्छरों को भगाने के लिए छिड़काव किया जाता है, वह मच्छर भगाने में नाकाम साबित हो रहा है। ऐसे में प्रतीत होता है कि इस छिड़काव में केरोसिन की काफी ज्यादा मात्रा होती है, जबकि दवा नगण्य स्थिति में होती है। जरूरत पड़ी तो कोर्ट खुद इसकी जांच कर सकता है। कोर्ट ने मौखिक कहा कि शहर के 10 फीसदी लोग भी यह नहीं बोलेंगे कि यहां मच्छरों की संख्या में कमी आयी है। सुनवाई के दौरान रांची नगर निगम की स्वास्थ्य अधिकारी कोर्ट में सशरीर उपस्थित थीं। कोर्ट ने स्वास्थ्य अधिकारी को फटकार लगाते हुए पूछा कि क्या आपने इस बात की जांच करायी है कि मच्छरों को भगाने के लिए छिड़काव में दवा की कितनी मात्रा है? खंडपीठ ने रांची नगर निगम को निर्देश दिया कि मच्छर भगाने के छिड़काव के मिश्रण में दवा की मात्रा की जांच करायी जाये। रांची नगर निगम की ओर से एलसीएन शाहदेव ने बताया गया कि मच्छरों को भगाने के लिए शहर के वार्डों में चार स्पेशल ड्राइव चलाया जा रहा है। पिछले एक माह से नाली की सफाई करायी जा रही है। दवा का छिड़काव कराया जा रहा है। अगली सुनवाई 18 अप्रैल को होगी।