आजाद सिपाही संवाददाता
रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ उनके ही इलाके में एक बड़ी साजिश रची गयी। मुख्यमंत्री साहेबगंज के बरहेट से विधायक हैं। यह बताने की कोशिश की गयी कि उनके इलाके के आदिवासी भूखे-प्यासे हैं। लॉकडाउन के दौरान आदिवासियों की सुधी लेनेवाला कोई नहीं है। आदिवासियों को उकसाने में उस इलाके के पत्रकार ने अहम भूमिका निभायी, जिसकी बातचीत रिकार्ड हो गयी। साजिश रचने के अरोप में साहेबगंज पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। इसमें दो पत्रकार भी शामिल हैं। इनमें एक देवजीत कुशवाहा और दूसरा रणविजय गुप्ता है। इनके अलावा तीन बिचौलिये भी पकड़े गये हैं। इनके खिलाफ राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी है। शनिवार को पतना प्रखंड स्थित केदुआ गांव में अचानक करीब 136 आदिवासी परिवार थाली लेकर निकल आये। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए वे सड़क पर ही बैठ गये। इसकी सूचना पाकर तुरंत ही एसडीओ मौके पर पहुंचे और गरीब परिवारों से उन्होंने बात की। जब मामले की उन्होंने पड़ताल की। तब तक एक ऑडियो भी वायरल हो चुका था। इससे खुलासा हुआ कि यह एक बड़ी साजिश थी, तो सीएम के खिलाफ रची गयी थी।
ऑडियो में स्पष्ट है कि पत्रकार लोगों को उकसा रहा है। कुछ स्थानीय नेताओं को साजिश में शामिल कर उन्हें लोगों को थाली लेकर सड़क पर आने के लिए उकसाया जा रहा है। पत्रकार कहता है कि लोगों को अनाज नहीं मिल रहा है। आप सभी थाली-लोटा लेकर चले आयें, देखिए फिर क्या होता है। पूरा हंगामा मच जायेगा। इस आॅडियो के वायरल होने के साथ ही जिला प्रशासन हरकत में आ गया। राज्य से जिला मुख्यालय तक फोन की घंटियां बजने लगी। फिर पूरे मामले की जांच करायी गयी। सात लोगों को चिह्नित किया गया, जो साजिश में शामिल थे। उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के आदेश दिये गये हैं।
क्या कहते हैं डीजीपी
दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तय है। उन्होंने कहा कि साहेबगंज प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि आॅडियो में जिनकी आवाज है, उन्हें चिह्नित करें और उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि गरीब आदिवासियों को बेबस और असहाय दिखाना •ाी अपराध है। फिलहाल कानूनी कार्रवाई शुरू हो गयी है और पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है।
क्या कहते हैं अनुमंडल पदाधिकारी
अनुमंडल पदाधिकारी राजमहल इस पूरे प्रकरण पर कहा कि केंदुआ गांव में जिन 136 परिवारों ने खाद्यान्न नहीं मिलने का दावा किया है, उनमें कई सुखी संपन्न परिवार हैं। जिनके यहां स्कॉर्पियो ट्रैक्टर वगैरह हैं। कुछ लोग साजिश के तहत गरीब लोगों को भड़का कर प्रशासन के सामने विपरीत परिस्थिति पैदा करना चाह रहे हैं। मौके पर जाकर उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच की है जो ग्रामीण सरकारी अनुदान प्राप्त करने का अहर्ता रखते हैं उन्हें तत्काल नियमानुसार खाद्यान्न पहले ही उपलब्ध करा दिया गया है।
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