पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा है कि राज्य सरकार अपनी विफलता का ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ना चाह रही है। केंद्र सरकार ने कोरोना से परेशान गरीब, जरूरतमंदों के लिए खजाने खोल दिये हैं। वहीं राज्य सरकार ने अपने ख़ज़ाना का मुँह बंद कर रखा है। राज्य सरकार चाहती है कि हर काम केंद्र सरकार करे। केंद्र सरकार ने झारखंड को प्रधानमंत्री वन धन योजना के तहत 415 करोड़ रुपये, मनरेगा के तहत राज्य सरकार को 602 करोड़ रुपये, एस.डी.आर.एम. फंड के लिए 284 करोड़ रुपये की सीधी आर्थिक सहायता दी है।
वहीं पीएम किसान योजना के तहत झारखंड में 2000 रुपये प्रति किसान केंद्र सरकार दे रही है। पूर्व की भाजपा सरकार की योजना को वर्तमान सरकार चालू रखती तो किसानों को और लाभ होता। भाजपा सरकार किसानो को 5000 से 25000 की आर्थिक सहायता दे रही थी। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत राशन कार्डधारियों को अगले तीन माह तक अतिरिक्त पांच किलो चावल या गेहूं, एक किलो दाल देने का निर्णय केंद्र सरकार ने लिया है। दिव्यांगों व विधवाओं को 1000 रुपये की सहायता, जन धन खाते में अगले तीन माह तक 500-500 रुपये की सहायता केंद्र दे रही है। उज्जवला योजना के तहत तीन माह तक फ्री सिलिंडर दिया जायेगा। मनरेगा में मजदूरी 182 रुपये से बढ़ाकर 202 रुपये कर दिया गया है। राज्य सरकार बताये की केंद्र से मिली सहायता को उसने कितना ज़मीन पर उतारा है। साथ ही ख़ुद के फ़ंड से क्या क्या किया है। झारखंड सरकार कोरोना के मामले में ठोस कदम उठाने की बजाय केंद्र का रोना रो रही है। राज्य सरकार न तो विधि व्यवस्था संभाल पा रही है न लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करा पा रही है। राहत कार्य की असलियत तो जगज़ाहिर है। जो लोग दूसरे राज्यों में फँसे हैं उनमें 90% को राज्य सरकार की तरफ़ से कोई सहायता नहीं मिली है।ये समय दोषारोपण करने की बजाय मिलकर काम करने का है। यही झारखंड की जनता के हक़ में है