वैश्विक महामारी कोरोना में जो लोग संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं उन पर जरुरी नहीं है कि आक्सीजन की कमी हो गई है। ऐसे में चिकित्सक के परामर्श के बिना किसी भी मरीज को आक्सीजन देने से परहेज करना चाहिये। अपने से आक्सीजन लगाना मरीज के लिए अत्यंत खतरा साबित हो सकता है।
इसके साथ ही वर्तमान में जो भय का वातावरण बना हुआ है उससे शहरवासी बाहर आएं और आक्सीजन की किसी भी प्रकार से कमी नहीं है। जिस मरीज को जितनी आवश्यकता होगी उनको चिकित्सक पर्याप्त मात्रा में आक्सीजन देकर उनका बेहतर इलाज करेंगे। यह बातें बुधवार को मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डा. अनिल कुमार मिश्र ने कही।
सीएमओ ने बताया कि चाहे कोविड मरीज हो या सामान्य मरीज उनको आक्सीजन की क्या जरुरत है कितनी मात्रा में दिया जाना है बिना चिकित्सा परामर्श के आक्सीजन नहीं दिया जाना चाहिये। सबसे बड़ी बात यह है कि हर व्यक्ति को आक्सीजन की आवश्यकता नहीं होती, चाहे वह कोविड पॉजिटिव ही क्यों न हो। यहां तक कि अगर किसी को हल्की सी सांस लेने में परेशानी हो रही है उसको भी पहले डाक्टर को दिखाएं तभी आक्सीजन देना उचित है। यदि ओवर आक्सीजन दे दिया या सेचुएशन के अनुसार लेवल 98 ले जाया गया तो आक्सीजन टॉक्सीडिटी का खतरा रहता है। अपने से आक्सीजन न लगायें जो कहीं से सिलेंडर पा जा रहे हैं उसकी क्वालिटी क्या है कहां से भराया गया है। इन सभी बातों का अत्याधिक महत्व है। अपने से आक्सीजन लगाने में अत्यन्त खतरा होता है। आक्सीजन की कमी की जो अफवाहें चल रही हैं वह  पूरी तरह से निराधार हैं।
आक्सीजन की सप्लाई जिला प्रशासन की देखरेख में हो रही है और जिलाधिकारी आलोक तिवारी, मंडलायुक्त डा. राजशेखर सहित औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना आक्सीजन सप्लायरों के साथ कई दौर की वार्ता कर चुके हैं। ऐसे में शहरवासी अपने मन में जो भय व्याप्त किये हैं कि आक्सीजन की कमी हैं उससे बाहर आयें और स्वस्थ्य मन से एक—दूसरे को मनोवैज्ञानिक ताकत दें, ताकि इस महामारी से मिलकर लड़ा जा सके।
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