आजाद सिपाही संवाददाता
नयी दिल्ली। कोरोना संकट को लेकर दिल्ली हाइकोर्ट ने एक बार फिर सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने बुधवार को कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि केंद्र चाहता है कि लोग मरते रहें, क्योंकि कोविड-19 के उपचार में रेमडेसिविर के इस्तेमाल को लेकर नये प्रोटोकॉल के मुताबिक केवल आॅक्सजीन पर आश्रित मरीजों को ही यह दवा दी जा सकती है। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने केंद्र सरकार से कहा कि यह गलत है। ऐसा लगता है यह प्रोटोकॉल बनाने में दिमाग का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं हुआ है। अब जिनके पास आॅक्सीजन की सुविधा नहीं है, उन्हें रेमडेसिविर दवा नहीं मिलेगी। ऐसा प्रतीत होता है कि आप चाहते हैं, लोग मरते रहें। उच्च न्यायालय ने कहा कि ऐसा लगता है कि केंद्र ने रेमडेसिविर की कमी की भरपाई के लिए प्रोटोकॉल ही बदल दिया है। यह सरासर कुप्रबंधन है। अदालत कोविड-19 से संक्रमित वकील की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उन्हें रेमडेसिविर की छह खुराकों में केवल तीन खुराकें ही मिल पायी थीं। अदालत के हस्तक्षेप के कारण वकील को बाकी खुराक मिल सकी।
सीरम इंस्टीट्यूट ने घटाया टीके का दाम
सीरम इंस्टीट्यूट ने बड़ी राहत देते हुए अपने टीके कोवीशील्ड का दाम घटा दिया है। राज्यों को अब इस टीके की एक खुराक के लिए चार सौ की जगह तीन सौ रुपये ही चुकाने होंगे। सीरम इंस्टीट्यूट के प्रमुख अदार पूनावाला ने बुधवार को ट्वीट कर यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कंपनी की परोपकारी नीति के प्रतीक स्वरूप कोवीशील्ड की कीमत घटायी जा रही है। इससे राज्यों को कई हजार करोड़ रुपये की बचत होगी। कीमत घटाने से वे अधिक टीका खरीद सकेंगे और टीकाकरण की गति तेज होगी, जिससे कीमती जानें बचायी जा सकेंगी।