रांची। झारखंड हाइकोर्ट ने अंतरिम आदेश के तहत मां भद्रकाली मंदिर,चतरा की देख-रेख व वित्तीय अधिकार प्रधान जिला न्यायाधीश, चतरा को देने का दिया निर्देश है। इससे पहले हाई कोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित करते हुये यह अधिकार चतरा उपायुक्त को दिया था। मां भद्रकाली मंदिर ट्रस्ट के योगेंद्र सिंह की ओर से झारखंड राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड द्वारा पुरानी कमेटी को भंग किये जाने और नई कमेटी बनाने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई झारखंड हाई कोर्ट में हुई।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि अंतरिम आदेश के तहत उपयुक्त, चतरा को जो मां भद्रकाली मंदिर की देख रेख व वित्तीय अधिकार प्रदान किया गया था वह उसे खत्म कर हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड द्वारा गठित नई कमेटी को यह अधिकार दिया जाये। इस पर प्रार्थी के अधिवक्ता की ओर से इसका विरोध करते हुये कहा गया कि तटस्थ व्यक्ति को यह अधिकार दिया जाना चाहिये। प्रार्थी, राज्य सरकार और नई कमेटी का पक्ष सुनने के बाद कोर्ट ने मां भद्रकाली मंदिर की देखरेख का संचालन का जिम्मा उपयुक्त, चतरा के बदले प्रधान जिला न्यायाधीश, चतरा को सौंपने का निर्देश दिया। इससे पहले प्रार्थी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि धार्मिक न्यास बोर्ड ने अपने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर बिना किसी स्पष्टीकरण से मां भद्रकाली मंदिर की पुरानी कमेटी को भंग कर दिया और नई कमेटी बना दी, जो कि उनके क्षेत्राधिकार से बाहर है।
नई समिति का गठन करने के पूर्व पुरानी समिति को जो की मंदिर का देखरेख करती है उसे स्पष्टीकरण देना होता है कि वे मंदिर का विकास सही तरीके से नहीं कर रहे हैं। लेकिन ऐसा नहीं किया गया।