नई दिल्ली। शिक्षक भर्ती घोटाले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर हमलावर है। भाजपा ने कहा कि पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार चरम पर है। शुक्रवार को भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में सांसद डॉ. संबित पात्रा ने कहा कि बंगाल में जो हो रहा है, उससे सभी वाकिफ हैं। बंगाल की परिस्थिति, बंगाल का भ्रष्टाचार, बंगाल में दीदी की दादागिरी आज पूरे भारत में ही नहीं बल्कि विश्व में लोग देख रहे हैं।
संबित पात्रा ने कहा कि ममता बनर्जी और उनकी सरकार में बंगाल में जिस प्रकार खुलेआम भ्रष्टाचार हो रहा है, आज उसकी गाज लाखों लोगों पर पड़ी है। कल सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल में हुए 2016 से 2021 के बीच हुए स्कूल भर्ती घोटाले पर निर्णय दिया है। लगभग 23-24 लाख आवेदकों ने बंगाल में टीचर और नॉन टीचिंग स्टाफ की पोस्ट के विज्ञापन के बाद उसके लिए आवेदन किया था और 2016 से 2021 के बीच लगभग 25,780 से अधिक टीचर और नॉन टीचिंग स्टाफ को नियुक्ति दी गई थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें इतनी बड़ी मात्रा में भ्रष्टाचार हुआ था कि इस विषय को लेकर अनेक लोग कोर्ट में गए थे और उस समय बंगाल में इसे स्कूल भर्ती घोटाले के नाम से जाना गया। उन्होंने कहा कि कल सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल में 2016 से 2021 के बीच हुए स्कूल भर्ती घोटाले पर अपना फैसला सुनाया। विज्ञापन प्रकाशित होने के बाद बंगाल में शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के पदों के लिए लगभग 2.3 से 2.4 मिलियन आवेदकों ने आवेदन किया। 2016 से 2021 के बीच 25,780 से अधिक शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति की गई।
उन्होंने कहा कि कल सुप्रीम कोर्ट ने इस घोटाले को लेकर अपना निर्णय देते हुए कहा कि हमने इस केस के तथ्य को जांचा है और पूरा का पूरा मामला यानी भर्ती प्रक्रिया में धांधली की गई है, इसमें धोखाधड़ी की गई है और इस मामले में विश्वनीयता एवं पात्रता की धज्जियां उड़ाई गई है। पात्रा ने कहा कि हरियाणा में दूसरी पार्टी के एक पूर्व मुख्यमंत्री को इसी तरह के भर्ती घोटाले में जेल जाना पड़ा था। दीदी भी जेल जाएंगी। अगर हम पश्चिम बंगाल में सत्ता में आए तो ममता बनर्जी पर कानून की पूरी ताकत पड़ेगी।
संबित पात्रा ने कहा कि पश्चिम बंगाल में कभी शिक्षकों का सम्मान होता था, लेकिन ममता बनर्जी की वजह से एक गोल्ड मेडलिस्ट को रोना पड़ रहा है। कोर्ट ने करीब 5,000 दागी उम्मीदवारों को हटाने का आदेश दिया था, लेकिन ममता बनर्जी ने टीएमसी नेताओं को बचाने के लिए सभी छात्रों को मिलाकर गड़बड़ी की। नतीजतन, 20,000 से अधिक छात्रों को नुकसान उठाना पड़ेगा। फिर भी, पैसे लेने वाले टीएमसी नेताओं को कोई परिणाम नहीं भुगतना पड़ा।