वाशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी से चल रहे युद्ध के बाद आखिरकार 40 दिनों में पहली बार संघर्ष विराम (सीजफायर) लागू हुआ है। दोनों देशों ने 14 दिनों के लिए युद्ध रोकने और वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत खोलने पर सहमति जताई है। यह समझौता पाकिस्तान की मध्यस्थता और चीन के हस्तक्षेप के बाद संभव हो सका। सीजफायर की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि एशियाई शेयर बाजारों में तेजी देखी गई है।
ट्रंप ने पाकिस्तान का प्रस्ताव स्वीकार किया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर युद्धविराम की जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने पाकिस्तान की ओर से दिए गए प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। इस प्रस्ताव में कहा गया है कि दो हफ्ते तक लड़ाई रोक दी जाए और होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत खोल दिया जाए। ट्रंप ने कहा, “हम अपने सभी सैन्य लक्ष्यों को पहले ही पूरा कर चुके हैं और उनसे भी आगे बढ़ चुके हैं। अब हम ईरान के साथ लंबे समय की शांति और पूरे मध्य पूर्व में शांति के लिए एक पक्का समझौता करने के बहुत करीब हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि वॉशिंगटन को तेहरान से 10 बिंदुओं का प्रस्ताव मिला है, जिसे बातचीत शुरू करने के लिए एक अच्छा आधार माना जा रहा है।
ईरान ने चीन के कहने पर मानी बात
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी कर युद्धविराम स्वीकार करने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की भाईचारे वाली अपील और अमेरिका द्वारा 15 बिंदुओं वाले प्रस्ताव के आधार पर बातचीत की मांग को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। अराघची ने स्पष्ट किया, “अगर ईरान पर हमले रुक जाते हैं, तो हमारी सशस्त्र सेनाएं अपनी रक्षात्मक कार्रवाई रोक देंगी। दो हफ्तों की अवधि के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही संभव होगी, लेकिन इसके लिए ईरान की सशस्त्र सेनाओं के साथ समन्वय करना होगा।”
न्यूयॉर्क टाइम्स ने तीन ईरानी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ईरान ने पाकिस्तान के प्रस्ताव को आखिरी समय में चीन के हस्तक्षेप के बाद स्वीकार किया। चीन, जो ईरान का महत्वपूर्ण सहयोगी है, ने तेहरान से लचीलापन दिखाने और तनाव कम करने को कहा। अधिकारियों के अनुसार इस युद्धविराम को ईरान के नए सर्वोच्च नेता आयतुल्ला मुजतबा खामेनेई ने मंजूरी दी है।
होर्मुज स्ट्रेट का महत्व
बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य एक संकरा समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया के कुल तेल उत्पादन का लगभग 20 प्रतिशत और एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। भारत, चीन और जापान जैसे देशों की ऊर्जा जरूरतों के लिए यह मार्ग अत्यधिक महत्वपूर्ण है। पिछले 40 दिनों में इस मार्ग पर तनाव के कारण तेल की कीमतों में भारी उछाल आया था और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई थी। सीजफायर के बाद अब उम्मीद जगी है कि आने वाले दिनों में तेल के दाम और नीचे आ सकते हैं। फिलहाल, अगले 14 दिनों में दोनों पक्ष स्थायी शांति समझौते के लिए बातचीत करेंगे, जिसमें ईरान ने यह गारंटी मांगी है कि अमेरिका और इजराइल आगे कोई हमला नहीं करेंगे।



