काठमांडू। नेपाल की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (RSP) के पांच सांसदों ने सिंधुली जिला प्रशासन कार्यालय के गेट पर धरना देकर पुलिस हिरासत में हुई एक युवक की मौत के मामले में न्याय की मांग की है। यह धरना शुक्रवार शाम से लगातार 12 घंटे से जारी है, जिसमें सांसद खगेन्द्र सुनार, रीमा विश्वकर्मा, सुष्मा स्वर्णकार, खिमा विश्वकर्मा और आशीष गजुरेल शामिल हैं। स्थानीय लोग और बुद्धिजीवी भी उनके साथ डटे हैं।
क्या है पूरा मामला?
22 वर्षीय श्रीकृष्ण बीके, सिंधुली के सुनकोशी ग्रामीण नगरपालिका-3, जुम्ले डाँडा के रहने वाले थे। 11 अप्रैल को उन्होंने खोटांग की एक 17 वर्षीय लड़की से अंतरजातीय प्रेम विवाह किया था। शादी के बाद वे ललितपुर में रह रहे थे, लेकिन 16 अप्रैल को ललितपुर पुलिस ने उन्हें बुलाकर हिरासत में ले लिया। आरोप था कि लड़की ने दुष्कर्म की शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने उन्हें अगले दिन सिंधुली भेज दिया, क्योंकि कथित घटना वहीं की बताई गई थी।
20 अप्रैल को खुरकोट पुलिस कार्यालय की हिरासत में श्रीकृष्ण मृत पाए गए। पुलिस के अनुसार, उनकी गर्दन में शर्ट बंधी हुई थी और वे बेहोश अवस्था में मिले। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हालांकि, परिजनों का आरोप पूरी तरह अलग है। उनका कहना है कि पुलिस ने हिरासत में प्रताड़ित कर पिटाई की, जिससे उनकी मौत हुई।
परिवार ने शव लेने से किया इनकार
परिजनों का दर्द यह है कि यह प्रेम विवाह था, दुष्कर्म नहीं। उनका आरोप है कि अंतरजातीय शादी के कारण लड़की के परिवार ने झूठा केस दर्ज कराया और पुलिस ने मिलीभगत से श्रीकृष्ण की हत्या कर दी। गुस्साए परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर पिछले चार दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं।
प्रशासन पर दबाव बढ़ता देख, 21 अप्रैल को एक जांच समिति का गठन किया गया। सिंधुली के सहायक प्रमुख जिला अधिकारी दीपेन्द्र पौडेल ने कहा, “हम गंभीरता से जांच कर रहे हैं। जल्द सच्चाई सामने आएगी।” ललितपुर पुलिस का कहना है कि शिकायत के बाद आरोपी को मूल जिला सिंधुली भेज दिया गया, आगे की कार्रवाई उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं थी।
सत्तारूढ़ सांसदों का रुख
सांसद खगेन्द्र सुनार ने फेसबुक पर लिखा, “हम पिछले 12 घंटे से जिला प्रशासन कार्यालय के गेट पर बैठे हैं।” उनके सहयोगी अर्जुन सुनार ने बताया कि सभी सांसद पूरी रात धरनास्थल पर डटे रहे। उनकी मांग है कि हिरासत में हुई मौत की स्वतंत्र जांच हो और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए।
यह मामला अब नेपाल में राजनीतिक बवाल बनता जा रहा है। सत्तारूढ़ पार्टी के ही सांसदों का सड़क पर उतरना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। देखना यह है कि जांच समिति क्या निष्कर्ष निकालती है और क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाता है।

