काठमांडू। नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू हो गई है। नवगठित बालेन्द्र शाह सरकार ने 1990 में लोकतंत्र की बहाली के बाद से सार्वजनिक पद पर रहे राजनीतिक नेताओं, वरिष्ठ नौकरशाहों और राजनीतिक नियुक्त अधिकारियों की संपत्तियों की व्यापक जांच शुरू करने की तैयारी कर ली है। सरकारी अनुमान के अनुसार, करीब 10 हजार लोग इस जांच के दायरे में आ सकते हैं। इनमें पूर्व प्रधानमंत्री, पूर्व मंत्री, पूर्व सांसद और उच्च पदस्थ सिविल सेवक शामिल हैं।

जांच प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए सरकार 15 दिनों के भीतर एक उच्चस्तरीय संपत्ति जांच समिति बनाने की योजना बना रही है। इस समिति में वित्त, राजस्व, कानून और जांच क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल होंगे। जांच दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में 2006 के जनआंदोलन के बाद से अब तक सार्वजनिक पद पर रहे व्यक्तियों की संपत्तियों की जांच होगी। दूसरे चरण में 1990 से 2005 के बीच पद पर रहे लोगों को शामिल किया जाएगा।

नेपाल पुलिस का केंद्रीय जांच ब्यूरो भी मनी लॉन्ड्रिंग विभाग से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर जांच शुरू करने की तैयारी में है। ब्यूरो के प्रमुख अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक डॉ. मनोज केसी ने बताया कि सरकार से लिखित निर्देश मिल चुका है और जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जांच के दायरे में पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा, केपी शर्मा ओली, पुष्प कमल दहल और माधव कुमार नेपाल जैसे शीर्ष नेता शामिल बताए जा रहे हैं। पूर्व मंत्री दीपक खड्का को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि पूर्व मंत्री आरज़ू राणा देउबा भी जांच के घेरे में हैं।

सरकार ने कई चर्चित भ्रष्टाचार मामलों की दोबारा जांच के संकेत भी दिए हैं। इनमें वाइड-बॉडी विमान खरीद घोटाला, ललिता निवास भूमि घोटाला, फर्जी भूटानी शरणार्थी घोटाला, सोना तस्करी मामला, सूडान घोटाला, टेरामोक्स सिस्टम मामला और मेलम्ची परियोजना जैसे बड़े मामले शामिल हैं। ये मामले पहले भी काफी चर्चा में रहे, लेकिन अब तक पूरी तरह सुलझ नहीं पाए हैं।

नेपाल में सार्वजनिक अधिकारियों पर वर्षों से अपनी ज्ञात आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगते रहे हैं। बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, भूमि सौदों और सार्वजनिक खरीद से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले अक्सर सामने आते रहे हैं। पहले भी कई जांच आयोग बनाए गए, लेकिन उनकी रिपोर्ट लागू न करने को लेकर आलोचना हुई। मौजूदा सरकार 1990 के बाद से सभी सार्वजनिक पदाधिकारियों की व्यापक जांच कर भ्रष्टाचार की जड़ तक पहुंचने के लिए प्रतिबद्ध है। यह कदम नेपाल के इतिहास में सबसे व्यापक भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों में से एक माना जा रहा है।

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version