रांची। प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य और एक करोड़ रुपये के इनामी नेता प्रशांत बोस का शुक्रवार तड़के निधन हो गया। वह रांची स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में बंद था, जहां उसने सुबह अंतिम सांस ली। उसकी उम्र करीब 80 वर्ष बताई जा रही है। जेल प्रशासन ने उसके निधन के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेज दिया है। प्रशांत बोस मूल रूप से पश्चिम बंगाल का निवासी था और नक्सली संगठन में ‘किशन दा’ के नाम से जाना जाता था।

जानकारी के अनुसार, वह पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले के जादवपुर स्थित विजयगढ़ कॉलोनी का रहने वाला था। नक्सली गतिविधियों में उसकी लंबे समय से सक्रिय भूमिका रही थी। वह पहले माओवादी कम्यूनिस्ट सेंटर ऑफ इंडिया (एमसीसीआई) का प्रमुख रहा। वर्ष 2004 में एमसीसीआई और पीपुल्स वार (पीडब्ल्यू) के विलय के बाद बने भाकपा (माओवादी) में उसे पोलित ब्यूरो सदस्य बनाया गया।

प्रशांत बोस संगठन की केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो का अहम सदस्य रहा। उसे संगठन में महासचिव नंबाला केशव राव के बाद दूसरा सबसे प्रभावशाली नेता माना जाता था। बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में उसकी सक्रियता रही थी। वह माओवादी गुरिल्ला आर्मी के संचालन और रणनीति में प्रमुख भूमिका निभाता था।

पुलिस ने 12 नवंबर 2021 को सरायकेला-खरसावां जिले के गिद्दिबेड़ा टोल प्लाजा से उसे उसकी पत्नी शीला मरांडी के साथ गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के समय उस पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। उस पर सारंडा में 16 जवानों की शहादत सहित कई बड़ी नक्सली घटनाओं में संलिप्तता के आरोप थे। उसके निधन के बाद सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

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