“कश्मीर की मुश्किलों पर बात करते हुए आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने कहा है कि पत्थरबाजों को पत्थर की जगह गोलियां चलानी चाहिए। उन्होंने कहा, “सच्चाई तो ये है कि इन लोगों (पत्थरबाजों) को हम पर पत्थर फेंकने की जगह फायरिंग करनी चाहिए। तब मुझे ज्यादा खुशी होगी। क्योंकि, तब मैं वो कर पाउंगा जो करना चाहता हूं।” ”

आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने मेजर गोगोई का बचाव भी किया। रावत ने कहा, “जब इस गंदी जंग में पत्थर और पेट्रोल बम फेंके जा रहे हों तो मैं अपने जवानों से ये नहीं कह सकता कि ‘इंतजार करो और मर जाओ।”

गौरतलब है कि श्रीनगर में 9 अप्रैल को उपचुनाव के दौरान पथराव कर रही हिंसक भीड़ के बीच से निकलने के लिए मेजर गोगोई ने कश्मीरी शख्स फारूख अहमद डार को मानव ढाल के तौर पर जीप के आगे बांधने का आदेश दिया था। जिसका कई नेताओं ने विरोध भी किया था। लेकिन, आर्मी चीफ की तरफ से गोगोई को प्रशंसा पत्र दिया गया था।

सेना प्रमुख रावत का कहना है कि इन सबके बावजूद अब भी सेना काफी धैर्य से काम कर रही है। उन्होंने कहा, “आर्मी चीफ के तौर पर मेरा काम जवानों का मनोबल बनाए रखना है। ये मेरा काम है। मैं जंग के मैदान से काफी दूर हूं। मैं सिर्फ उनसे ये कह सकता हूं कि मैं उनके साथ हूं।”

रावत ने कहा कि कश्मीर में हमारी सेना जिस तरह के ‘डर्टी वॉर’ का सामना कर रही है, उससे निपटने के लिए ‘इनोवेटिव’ तरीके ही जरूरी हैं। उन्होंने आगे कहा, “लोग हम पर पत्थर और पेट्रोल बम फेंक रहे हैं। ऐसे में अगर मेरे जवान मुझसे पूछते हैं- सर क्या किया जाए? तो क्या आर्मी चीफ के तौर पर अपनी टीम से ये कहूंगा- इंतजार करो और मर जाओ। मैं नेशनल फ्लैग लगे अच्छे कॉफिन लाया हूं। तुम्हारे पार्थिव शरीर सम्मान के साथ घर पहुंचाए जाएंगे। याद रखिए, मुझे अपनी टीम का मनोबल ऊंचा रखना है। वो बेहद मुश्किल हालात में काम कर रहे हैं।”

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