नयी दिल्ली। 23 मई 2019 का दिन आजाद भारत के राजनीतिक इतिहास में नयी इबारत लिख गया। सुबह आठ बजे देश के 542 संसदीय क्षेत्रों में इवीएम के खुलते ही मानो सुनामी आ गयी। दिन बीतते-बीतते साफ हो गया कि नरेंद्र मोदी की अगुआई में भाजपा ने इतिहास रच दिया है। 2014 में सत्ता का विरोध कर महाविजय हासिल करने वाले मोदी 2019 में अपनी सत्ता कायम रखते हुए उससे भी प्रचंड विजय के साथ फिर अपने लोकतिलक के लिए तैयार हैं।
वर्ष 2014 में 10 साल की संप्रग सरकार के भ्रष्टाचार और नाकामी पर जबर्दस्त हमला करने वाले मोदी 2019 में बालाकोट होते हुए अपने लक्ष्य पर सटीक निशाना लगाने में कामयाब हुए हैं।
मतदान के अंतिम चरणों में सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस संदेश में कोई अतिशयोक्ति नहीं दिखाई देती कि पूरी 542 सीटों पर केवल एक ही व्यक्ति चुनाव लड़ रहा था- नरेंद्र मोदी। भाजपा के उम्मीदवार सब गौण हो गये थे। उम्मीदवार को अनदेखा कर लोग सिर्फ मोदी को जिताने के लिए वोट कर रहे थे।
मोदी सुनामी का आलम यह रहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी अमेठी सीट भी नहीं बचा सके। विपक्ष के कई अन्य दिग्गज भी इस सुनामी में बह गये। जैसे-जैसे चुनाव परिणाम घोषित होते गये, विपक्षी पार्टियों के दिग्गज ताश के पत्ते की तरह ढेर होते गये। मोदी मैजिक के आगे न जाति की चली, न धर्म की। केवल नीयत और काम पर ही लोगों के वोट भाजपा को मिले। शाम ढलने के साथ ही मोदी अपने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के साथ भाजपा मुख्यालय पहुंचे, तो वहां मौजूद लोगों ने फूलों की बारिश से उनका स्वागत किया। मोदी ने गगनभेदी नारों के बीच अपने संबोधन में कहा कि आज भारत की जनता ने इस फकीर की झोली को वोटों से भर दिया है। अब नये भारत के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है। हम ऐसा भारत बनायेंगे, जिसके आगे दुनिया नतमस्तक होगी।
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